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Ghazipur News: फर्जी आदेश निरस्त, गांव में भेजे गए छह लेखपाल
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बैरिया। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी बलिया सचेंद्र कुमार सिंह ने दलन छपरा निवासी सुशील कुमार पांडेय की ओर से लगाए गए अनियमितता के तमाम आरोपों को सही पाया है। उनके चक पर अंकित फर्जी आदेश (अमल दरामद) को निरस्त कर दिया है। किसानों से चकबंदी पर्ची वापस लेने के लिए छह लेखपालों को दलन छपरा भेजा है। ये ऐसे लोगों को चिह्नित कर रहे हैं, जिन पर चकबंदी की प्रक्रिया में विभागीय कर्मियों से मिलकर घालमेल करने का अंदेशा है। उनसे चक पर्ची वापस ली जा रही है।
बता दें कि दो दशकों से दलन छपरा की चल रही चकबंदी प्रक्रिया में दबंगों ने विभागीय लोगों की मिलीभगत से सरकारी और गैर सरकारी जमीन पर अपना नाम दर्ज करा लिया था। गरीब और कमजोर लोगों का जमीन पर अपना चक बनवाने सहित कई तरह की अनियमितताएं बरती गई थीं। इससे पूरा गांव त्रस्त था। सुशील कुमार पांडेय ने इस प्रकरण को प्रमुख सचिव से लेकर चकबंदी आयुक्त के समक्ष उठाया। सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने पत्र लिखकर सुशील पांडेय के आरोपों को सही बताते हुए निष्पक्ष जांच कर कर उचित कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके क्रम में हुई जांच के बाद 31 चकबंदी के अधिकारियों-कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें बंदोबस्त अधिकारी से लेकर लेखपाल तक शामिल थे। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। इस चकबंदी में करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन का आरोप लोग अब लग रहे हैं।
सुशील पांडेय के लगाए गए आरोप को सही पाते हुए उनके पक्ष में बंदोबस्त अधिकारी ने निर्णय दिया है। इससे गांव के लोगों में जिनकी जमीन दबंग के कब्जे में है। उन्हें अपनी जमीन मिलने की आस जगी है। वहीं, चकबंदी में फर्जीवाड़ा करने वाले दबंग लगातार हाथ पैर मारकर चकबंदी को रद होने से बचाने में लगे हैं। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद चकबंदी विभाग अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।
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मैंने दलन छपरा निवासी सुशील पांडेय बनाम ब्रिज किशोर आदि के मुकदमे को खारिज करके गुण दोष के आधार पर निस्तारण कर दिया है। सुशील के आरोप सही हैं। इसी तरह के आरोप से संबंधित कई प्रकरण हैं। इस पर तत्काल गुण दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। जरूरत पड़ेगी तो दलन छपरा की चकबंदी दोबारा की जा सकती है। फिलहाल चक पर्ची एकत्र की जा रही है। भाग 23 फट गया है। इसलिए कठिनाई हो रही है। किसी भी काश्तकार के साथ नाइंसाफी नहीं होगी।-सचेंद्र कुमार सिंह, बंदोबस्त अधिकारी, बलिया
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बता दें कि दो दशकों से दलन छपरा की चल रही चकबंदी प्रक्रिया में दबंगों ने विभागीय लोगों की मिलीभगत से सरकारी और गैर सरकारी जमीन पर अपना नाम दर्ज करा लिया था। गरीब और कमजोर लोगों का जमीन पर अपना चक बनवाने सहित कई तरह की अनियमितताएं बरती गई थीं। इससे पूरा गांव त्रस्त था। सुशील कुमार पांडेय ने इस प्रकरण को प्रमुख सचिव से लेकर चकबंदी आयुक्त के समक्ष उठाया। सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने पत्र लिखकर सुशील पांडेय के आरोपों को सही बताते हुए निष्पक्ष जांच कर कर उचित कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके क्रम में हुई जांच के बाद 31 चकबंदी के अधिकारियों-कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें बंदोबस्त अधिकारी से लेकर लेखपाल तक शामिल थे। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। इस चकबंदी में करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन का आरोप लोग अब लग रहे हैं।
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सुशील पांडेय के लगाए गए आरोप को सही पाते हुए उनके पक्ष में बंदोबस्त अधिकारी ने निर्णय दिया है। इससे गांव के लोगों में जिनकी जमीन दबंग के कब्जे में है। उन्हें अपनी जमीन मिलने की आस जगी है। वहीं, चकबंदी में फर्जीवाड़ा करने वाले दबंग लगातार हाथ पैर मारकर चकबंदी को रद होने से बचाने में लगे हैं। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद चकबंदी विभाग अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।
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मैंने दलन छपरा निवासी सुशील पांडेय बनाम ब्रिज किशोर आदि के मुकदमे को खारिज करके गुण दोष के आधार पर निस्तारण कर दिया है। सुशील के आरोप सही हैं। इसी तरह के आरोप से संबंधित कई प्रकरण हैं। इस पर तत्काल गुण दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। जरूरत पड़ेगी तो दलन छपरा की चकबंदी दोबारा की जा सकती है। फिलहाल चक पर्ची एकत्र की जा रही है। भाग 23 फट गया है। इसलिए कठिनाई हो रही है। किसी भी काश्तकार के साथ नाइंसाफी नहीं होगी।-सचेंद्र कुमार सिंह, बंदोबस्त अधिकारी, बलिया