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किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाली हानियों के बारे में बताया
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कृषि विज्ञान केंद्र के परिसर में प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी व परियोजना निदेशक की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को गोष्ठी हुई। इसमें किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाली हानियों के बारे में बताया गया। इसी के साथ अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन की विधि भी बताई गई।
उप कृषि निदेशक अतींद्र सिंह ने बताया कि गत वर्ष पांच किसानों ने फसल अवशेषों में आग लगाई थी जिनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। बार-बार मना करने के बाद भी कोई फसल अवशेष में आग लगाता है तो कृषि विभाग द्वारा देय सुविधाएं बंद कर दी जाएगी। किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी नहीं दिया जाएगा। विभाग द्वारा आठ कृषक सहकारी समितियों, गन्ना समितियों, औद्यानिक समितियों, पंचायतों को फार्म मशीनरी बैंक उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें 80 प्रतिशत अनुदान पर फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्र उपलब्ध हैं। बताया कि ये यंत्र फसल अवशेषों को काटकर मिट्टी में मिला देता है। इन फसल अवशेषों को मिटटी में दबाने से कम उर्वरक की आवश्यकता पड़ती है तथा कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है। इस कारण अन्य पोषक तत्व सुगमता से उपलब्ध होते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि फसल अवशेषों के प्रबंधन से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। पशुओं के चारा की व्यवस्था हो जाएगी इससे किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचेगा। किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने के कारण मीथेन, कार्बन मोनो आक्साइड जैसी हानिकारक गैसों से निजात मिलेगी। अध्यक्षता करते हुए परियोजना निदेशक बालगोविंद ने अवगत कराया कि अन्नदाता किसान मजबूत इच्छा शक्ति के भरोसे फसल अवशेष का प्रबंधन करेंगे तथा फसल अवशेष जलाने की पुनरावृत्ति नहीं करेंगे।
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उप कृषि निदेशक अतींद्र सिंह ने बताया कि गत वर्ष पांच किसानों ने फसल अवशेषों में आग लगाई थी जिनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। बार-बार मना करने के बाद भी कोई फसल अवशेष में आग लगाता है तो कृषि विभाग द्वारा देय सुविधाएं बंद कर दी जाएगी। किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी नहीं दिया जाएगा। विभाग द्वारा आठ कृषक सहकारी समितियों, गन्ना समितियों, औद्यानिक समितियों, पंचायतों को फार्म मशीनरी बैंक उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें 80 प्रतिशत अनुदान पर फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्र उपलब्ध हैं। बताया कि ये यंत्र फसल अवशेषों को काटकर मिट्टी में मिला देता है। इन फसल अवशेषों को मिटटी में दबाने से कम उर्वरक की आवश्यकता पड़ती है तथा कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है। इस कारण अन्य पोषक तत्व सुगमता से उपलब्ध होते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि फसल अवशेषों के प्रबंधन से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। पशुओं के चारा की व्यवस्था हो जाएगी इससे किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचेगा। किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने के कारण मीथेन, कार्बन मोनो आक्साइड जैसी हानिकारक गैसों से निजात मिलेगी। अध्यक्षता करते हुए परियोजना निदेशक बालगोविंद ने अवगत कराया कि अन्नदाता किसान मजबूत इच्छा शक्ति के भरोसे फसल अवशेष का प्रबंधन करेंगे तथा फसल अवशेष जलाने की पुनरावृत्ति नहीं करेंगे।
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