{"_id":"63c2f77bbac9b84de950d92c","slug":"donation-of-sesame-to-collect-virtue-by-bathing-in-ganga-ghazipur-news-vns693746841-2023-01-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: गंगा स्नान कर पुण्य बटोरने के लिए तिल का दान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: गंगा स्नान कर पुण्य बटोरने के लिए तिल का दान
विज्ञापन
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को मकर संक्रांति का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। सुबह श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। इसके बाद पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की और काले तिल, गुड़ व खिचड़ी के सामान का दान-पुण्य किया। दिन में लोगों ने लाई-चूड़ा और शाम को दही संग खिचड़ी का आनंद उठाया। बच्चों ने जमकर पतंगबाजी की जिससे पूरे दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ती रहीं।
मकर संक्रांति पर्व पर गंगा स्नान का काफी महत्व है। मौसम साफ होने के कारण शहर के गंगा घाटों पर भोर से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरु हो गया था। श्रद्धालु विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान के लिए पहुंचे थे। शहर के ददरीघाट, कलेक्टर घाट, चीतनाथ सहित अन्य घाटों पर गंगा स्नान के लिए सुबह दस बजे तक स्नानार्थियों की भीड़ रही।
लोगों ने गंगा स्नान कर घाटों पर स्थित मंदिरों में पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। स्नान करने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा रही। पूरे आस्था के साथ गंगा में गोते लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान-पुण्य भी किया। मकर संक्रांति पर्व पर गंगा स्नान के साथ ही लाई-चूड़ा और दही खाने की परंपरा है। इसके अनुसार शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने सुबह लाई-चूड़ा और दही तथा शाम को खिचड़ी का स्वाद चखा।
विज्ञापन
पर्व के मौके पर बच्चों ने जमकर पतंगबाजी की। सुबह से ही भक्काटे की आवाज गली-मुहल्लों में गूंजती रही। पतंग की स्थाई एवं अस्थाई दुकानों पर बच्चों के साथ ही बड़ों की भी पतंग खरीदने को लेकर भीड़ बनी रही। पूरे दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों से लोग पेंच लड़ाते नजर आए। विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में भी मकर संक्रांति का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया।
गुड़ व काले तिल का दान
मौधा। 14 जनवरी अर्थात बीते शनिवार के दिन भी लोगों ने गंगा स्नान करने के बाद भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। कुछ लोगों ने तड़के ही अपने घरों में स्नान करने के बाद दान पुण्य किया। वहीं अधिकांश लोगों ने घाटों पर पहुंच कर मोक्षदायिनी गंगा में स्नान कर भगवान भास्कर की उपासना करने के बाद दान व पुण्य किया। हालांकि उदया तिथि के अनुसार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। काशिका ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र के निदेशक आचार्य धीरेंद्र मनीषी ने बताया कि इस साल मकर संक्रांति रविवार के दिन पड़ रही है।
रविवार को सूर्य देव की उपासना की जाती है, और मकर संक्रांति के दिन भी सूर्य की उपासना की जाती है। ऐसे में इस बार सूर्य पूजा के लिए मकर संक्रांति का दिन और भी अधिक शुभ है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से उसका अधिक फल प्राप्त होगा। क्योंकि इसी दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इसी दिन से खरमास का समापन होता है, और विवाह गृह प्रवेश आदि जैसे मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। सूर्य के उत्तरायण होते ही दिन की अवधि धीरे धीरे बढ़ने लगती है। सर्दी कम होने लगती है और तापमान बढ़ने लगता है।
विज्ञापन
मकर संक्रांति पर्व पर गंगा स्नान का काफी महत्व है। मौसम साफ होने के कारण शहर के गंगा घाटों पर भोर से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरु हो गया था। श्रद्धालु विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान के लिए पहुंचे थे। शहर के ददरीघाट, कलेक्टर घाट, चीतनाथ सहित अन्य घाटों पर गंगा स्नान के लिए सुबह दस बजे तक स्नानार्थियों की भीड़ रही।
विज्ञापन
लोगों ने गंगा स्नान कर घाटों पर स्थित मंदिरों में पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। स्नान करने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा रही। पूरे आस्था के साथ गंगा में गोते लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान-पुण्य भी किया। मकर संक्रांति पर्व पर गंगा स्नान के साथ ही लाई-चूड़ा और दही खाने की परंपरा है। इसके अनुसार शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने सुबह लाई-चूड़ा और दही तथा शाम को खिचड़ी का स्वाद चखा।
विज्ञापन
पर्व के मौके पर बच्चों ने जमकर पतंगबाजी की। सुबह से ही भक्काटे की आवाज गली-मुहल्लों में गूंजती रही। पतंग की स्थाई एवं अस्थाई दुकानों पर बच्चों के साथ ही बड़ों की भी पतंग खरीदने को लेकर भीड़ बनी रही। पूरे दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों से लोग पेंच लड़ाते नजर आए। विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में भी मकर संक्रांति का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया।
गुड़ व काले तिल का दान
मौधा। 14 जनवरी अर्थात बीते शनिवार के दिन भी लोगों ने गंगा स्नान करने के बाद भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। कुछ लोगों ने तड़के ही अपने घरों में स्नान करने के बाद दान पुण्य किया। वहीं अधिकांश लोगों ने घाटों पर पहुंच कर मोक्षदायिनी गंगा में स्नान कर भगवान भास्कर की उपासना करने के बाद दान व पुण्य किया। हालांकि उदया तिथि के अनुसार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। काशिका ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र के निदेशक आचार्य धीरेंद्र मनीषी ने बताया कि इस साल मकर संक्रांति रविवार के दिन पड़ रही है।
रविवार को सूर्य देव की उपासना की जाती है, और मकर संक्रांति के दिन भी सूर्य की उपासना की जाती है। ऐसे में इस बार सूर्य पूजा के लिए मकर संक्रांति का दिन और भी अधिक शुभ है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से उसका अधिक फल प्राप्त होगा। क्योंकि इसी दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इसी दिन से खरमास का समापन होता है, और विवाह गृह प्रवेश आदि जैसे मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। सूर्य के उत्तरायण होते ही दिन की अवधि धीरे धीरे बढ़ने लगती है। सर्दी कम होने लगती है और तापमान बढ़ने लगता है।