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विस्थापित परिवारों को आवंटित जमीन की उपलब्ध कराई गई अभिलेख

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jun 2021 11:33 PM IST
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कासिमाबाद के शेखनपुर में बेघर हुए पीड़ितों को आवंटित भूमि के बारे में जानकारी देते हुए उपजिलाधि?
कासिमाबाद के शेखनपुर में बेघर हुए पीड़ितों को आवंटित भूमि के बारे में जानकारी देते हुए उपजिलाधि? - फोटो : GHAZIPUR
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कासिमाबाद। कोतवाली क्षेत्र के शेखनपुर गांव में बीते जनवरी माह में जमीन धंसने के कारण छह परिवारों की मकानों में दरार पड़ गई थी। इसको लेकर प्रशासन जहां जमीन धंसी थी। वहां के छह परिवारों के मकान खाली कराकर पास के प्राथमिक विद्यालय में विस्थापित कराने के साथ ही सभी को आवास के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध करा दी गई थी। रविवार को एसडीएम ने सभी विस्थापित परिवारों को आवंटित जमीन से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराते हुए आवास बनाने का निर्देश दिया। बीते कई माह से विस्थापित जमीन एवं आवास की मांग कर रहे थे। जमीन का कागज मिलते ही उनके चेहरे खिल उठे। मालूम हो कि कासिमाबाद विकासखंड का शेखनपुर गांव कासिमाबाद-गाजीपुर मार्ग पर स्थित है। मुख्य मार्ग से 50 मीटर पूरब राजकुमार पासवान अपने पांच कमरों के मकान में परिवार सहित रहते थे। बताया जाता है कि दीपावली के लगभग इनके मकान में एक जगह दरार दिखाई दिया था। इसको परिजनों ने गंभीरता से नहीं लिया था। तीन दिन बाद राजकुमार पासवान के घर के सामने 20 फीट का गहरी खाई बन गई थी। इससे ग्रामीणों में भारी दहशत पैदा हो गई थी। इसके बाद उपजिलाधिकारी भारत भार्गव ने पूरी घटना से जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह को अवगत कराते हुए तकनीकी टीम की मांग की थी। इसमें राजकुमार पासवान की पांच कमरे का मकान चारों तरफ जगह-जगह उपर नीचे फट चुकी थी। इसी तरह शारदा देवी की तीन कमरे की मकान, संतोष पासवान के तीन कमरे की मकान, भरत गौड़ के तीन कमरे के मकान, रामलाल गौड़ के दो कमरे की मकान के साथ रामदास राजभर की दो कमरा, रसोई घर, झोपड़ी, आंगन में चारों तरफ से फट कर दरार पड़ चुका था। वाराणसी की भूगर्भ वैज्ञानिकों ने 100 मीटर के चारों तरफ सभी की मकान खाली कराने के साथ उन्हें दूसरी जगह विस्थापित कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी ने सभी विस्थापितों को आवास बनाने के लिए भूमि उपलब्ध करा दी थी। आवंटित भूमि विस्थापितों को पसंद नहीं आयी थी। उपजिलाधिकारी भारत भार्गव ने सभी विस्थापित परिवारों को दूसरी जगह जमीन आवंटित करते हुए उन्हें आवंटन पत्र सौंपा। इधर बरसात होने से जो जमीन जनवरी माह में धंसी थी उसका आकार फिर बढ़ गया है। जमीन का कागजात पाते ही विस्थापित परिवारों के चेहरे खिल उठे और लंबे समय से चल रही उनकी मांग पूरी हो गई।
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