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जिला अस्पताल एंडोस्कोपी सुविधा से होगा लैस
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जिला अस्पताल में जल्द ही एंडोस्कोपी जांच की सुविधा मुहैया होगी। इसको लेकर कवायद तेज कर दी गई है। दो चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने के लिए राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य ने मेडिकल एजुकेशन के अधिकारियों को पत्र भी लिखा है। वहां से निर्देश जारी होते ही मशीन स्थापित कराने की प्रक्रिया भी तेज हो जाएगी। जिससे छह महीने में सुविधा शुरू की जा सके और मरीजों को गैर जनपद का सहारा न लेना पड़े।
पेट में किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर एंडोस्कोपी की जांच के बाद मरीजों को इलाज किया जा सकेगा। इस जांच को करने के लिए दो चिकित्सकों की टीम को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। एंडोस्कोपी एक लंबी, पतली और लचीली ट्यूब होती है। इसके एक सिरे पर लाइट और कैमरा लगा होता है। कैमरे की मदद से ली गई तस्वीरें कंप्यूटर स्क्रीन पर भेजी जाती हैं। एंडोस्कोपी मशीन में पेट से जुड़ी अनेक बीमारियों में अल्सर, कैंसर, खून की उल्टी होने की वजह, मेलिना, छाती-पेट में दर्द, भोजन का नहीं पचना आदि शामिल हैें। जांच के बाद रोग स्पष्ट होने से उपचार शुरू करने में सुविधा होगी। इस जांच की व्यवस्था न होने से मरीजों को गैर जनपदों का सहारा लेना पड़ता है। यहीं नहीं प्राईवेट संस्थानों में जांच कराने पर आर्थिक दंश भी झेलना पड़ता है। ऐसे में इस सुविधा से लैस होने से जहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग लाभांवित होगा, वहीं जिला अस्पताल की जांच व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। इस संबंध में राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डा. आंनद कुमार मिश्रा ने बताया कि एंडोस्कोपी की जांच की सुविधा शुरू करने के लिए दो चिकित्सकों को प्रशिक्षण के लिए पत्र मेडिकल एजुकेशन को भेजा गया है। वहां से निर्देश प्राप्त होने के बाद चिकित्सकों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। तीन माह के प्रशिक्षण के बाद मशीन स्थापित कराने की कवायद शुुरू होगी। छह माह में यह सुविधा लोगों को मिलने लगेगी।
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पेट में किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर एंडोस्कोपी की जांच के बाद मरीजों को इलाज किया जा सकेगा। इस जांच को करने के लिए दो चिकित्सकों की टीम को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। एंडोस्कोपी एक लंबी, पतली और लचीली ट्यूब होती है। इसके एक सिरे पर लाइट और कैमरा लगा होता है। कैमरे की मदद से ली गई तस्वीरें कंप्यूटर स्क्रीन पर भेजी जाती हैं। एंडोस्कोपी मशीन में पेट से जुड़ी अनेक बीमारियों में अल्सर, कैंसर, खून की उल्टी होने की वजह, मेलिना, छाती-पेट में दर्द, भोजन का नहीं पचना आदि शामिल हैें। जांच के बाद रोग स्पष्ट होने से उपचार शुरू करने में सुविधा होगी। इस जांच की व्यवस्था न होने से मरीजों को गैर जनपदों का सहारा लेना पड़ता है। यहीं नहीं प्राईवेट संस्थानों में जांच कराने पर आर्थिक दंश भी झेलना पड़ता है। ऐसे में इस सुविधा से लैस होने से जहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग लाभांवित होगा, वहीं जिला अस्पताल की जांच व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। इस संबंध में राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डा. आंनद कुमार मिश्रा ने बताया कि एंडोस्कोपी की जांच की सुविधा शुरू करने के लिए दो चिकित्सकों को प्रशिक्षण के लिए पत्र मेडिकल एजुकेशन को भेजा गया है। वहां से निर्देश प्राप्त होने के बाद चिकित्सकों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। तीन माह के प्रशिक्षण के बाद मशीन स्थापित कराने की कवायद शुुरू होगी। छह माह में यह सुविधा लोगों को मिलने लगेगी।
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