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तार-तार हो रही भारतीय संस्कृति और संस्कार
ब्यूरो/ अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sat, 03 Oct 2015 11:18 PM IST
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भारतीय सिनेमा मनोरंजन के माध्यम के साथ सांस्कृतिक विविधताओं का संवाहक है। भोजपुरी की दूषित मानसिकता से जुड़े कुछ लोग भोजपुरी सिनेमा के नाम पर घटिया प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि यह भाषा सबसे मीठी भाषा है। ये बातें
शनिवार को कौशिक मैरेज हाल में बीएनआई नेटवर्किंग (एक व्यवसायिक कार्यक्रम) में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने आए छोटे पर्दे के नामचीन कलाकार जेपी शर्मा (शकुनी मामा) ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहीं।
मूलत: राजस्थान के नागौर जिले के लांडनू गांव निवासी और रामानंद सागर रचित महाभारत सीरियल में शकुनी मामा तथा फिल्म आंखें में कंगारू नामक खलनायक की भूमिका निभाने वाले जेपी शर्मा ने कहा कि बोली, भाषा, समाज
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और संस्कृति के प्राण होते हैं। देश की विविध भाषाएं और बोलियां विश्व मंच पर लोगों को सम्मोहित करती हैं। कहा कि बड़े पर्दे पर मनोरंजन के नाम पर परोसी जाती अश्लीलता परिवार के लोगों को जहां नजरें चुराने को मजबूर करती हैं,
वहीं समाज में बेचैनी पैदा करती हैं। निर्माता और कलाकार पैसा कमाने की होड़ में संस्कृति और संस्कार दोनों को तार-तार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भोजपुरी सिनेमा अपनी मीठी बोली के चलते देश के अन्य हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी पसंद की जाती है, लेकिन विगत कुछ वर्षों से इसका स्वरूप इतना बिगड़ गया है कि भोजपुरी के नाम पर लोग नाक सिकोड़ने लगे हैं।
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शनिवार को कौशिक मैरेज हाल में बीएनआई नेटवर्किंग (एक व्यवसायिक कार्यक्रम) में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने आए छोटे पर्दे के नामचीन कलाकार जेपी शर्मा (शकुनी मामा) ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहीं।
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मूलत: राजस्थान के नागौर जिले के लांडनू गांव निवासी और रामानंद सागर रचित महाभारत सीरियल में शकुनी मामा तथा फिल्म आंखें में कंगारू नामक खलनायक की भूमिका निभाने वाले जेपी शर्मा ने कहा कि बोली, भाषा, समाज
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और संस्कृति के प्राण होते हैं। देश की विविध भाषाएं और बोलियां विश्व मंच पर लोगों को सम्मोहित करती हैं। कहा कि बड़े पर्दे पर मनोरंजन के नाम पर परोसी जाती अश्लीलता परिवार के लोगों को जहां नजरें चुराने को मजबूर करती हैं,
वहीं समाज में बेचैनी पैदा करती हैं। निर्माता और कलाकार पैसा कमाने की होड़ में संस्कृति और संस्कार दोनों को तार-तार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भोजपुरी सिनेमा अपनी मीठी बोली के चलते देश के अन्य हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी पसंद की जाती है, लेकिन विगत कुछ वर्षों से इसका स्वरूप इतना बिगड़ गया है कि भोजपुरी के नाम पर लोग नाक सिकोड़ने लगे हैं।