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विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना की
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सोमवती अमावस्या पर पीपल की परिक्रमा करती महिलाएं।
- फोटो : GHAZIPUR
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मौधा। सोमवती अमावस्या पर सोमवार को महिलाओं ने व्रत रखकर पीपल के वृक्ष की पूजा कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना की। उन्होंने पीपल के पेड़ पर108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा की और जीवन साथी की लंबी आयु एवं संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मांगा। सैदपुर और औड़िहार में गंगा स्नान कर श्रद्धालुओं ने वस्त्र, अनाज दान किया और गाय को चारा खिलाकर सुखी और निरोग रहने का अक्षय फल प्राप्त किया। डढ़वल गांव के आचार्य वरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सोमवती अमावस्या पर मौन व्रत रखने से हजार गोदान का फल मिलता है। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन आदि से पूजा कर उसके चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान है। सोमवार का दिन होने के कारण श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव की भी पूजा करते हैं, जिससे मानसिक परेशानियां दूर हो जाती हैं।
रिंकी शर्मा ने बताया कि पीपल के पेड़ में सभी देवताओं का वास होता है। आराधना करने से सारे सुख प्राप्त होने लगते हैं। सोनी शर्मा ने बताया कि सुहागिनें अपने सुहाग के दीर्घायु होने की कामना लेकर यह व्रत करती हैं।
प्रतीक्षा पांडेय ने बताया किपीपल के मूल भाग में विष्णु जी, अग्र में ब्रम्हा जी और तने में शिव जी का वास माना गया है। इसलिए परिवार के सुख और वंश की वृद्धि के लिए पीपल की पूजा की जाती है। अमृता तिवारी ने बताया कि इस दिन की पूजा करने से पितरों के अलावा पीपल में मौजूद सारे देवी-देवताओं के साथ ब्रम्हा, विष्णु और महेश भी प्रसन्न होते हैं।
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रिंकी शर्मा ने बताया कि पीपल के पेड़ में सभी देवताओं का वास होता है। आराधना करने से सारे सुख प्राप्त होने लगते हैं। सोनी शर्मा ने बताया कि सुहागिनें अपने सुहाग के दीर्घायु होने की कामना लेकर यह व्रत करती हैं।
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प्रतीक्षा पांडेय ने बताया किपीपल के मूल भाग में विष्णु जी, अग्र में ब्रम्हा जी और तने में शिव जी का वास माना गया है। इसलिए परिवार के सुख और वंश की वृद्धि के लिए पीपल की पूजा की जाती है। अमृता तिवारी ने बताया कि इस दिन की पूजा करने से पितरों के अलावा पीपल में मौजूद सारे देवी-देवताओं के साथ ब्रम्हा, विष्णु और महेश भी प्रसन्न होते हैं।
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