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हत्या के प्रयास मामले में दो को कारावास
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Wed, 30 Mar 2016 12:32 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : file photo
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भांवरकोल थाना क्षेत्र के सियाड़ी गांव में 2004 में आनंद शंकर राय को गोली मारकर हत्या का प्रयास करने के मामले में दो सगे भाइयों को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय अजय पाल सिंह की अदालत ने सात-सात साल के सश्रम कारावास और 40-40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर अभियुक्तों को छह-छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
भांवरकोल थाना क्षेत्र के सियाड़ी गांव निवासी हीरालाल राय पुत्र रामलखन राय ने दो सितंबर 2004 को भांवरकोल थाने में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि सुबह आठ बजे उनका पुत्र आनंद शंकर राय जले हुए ट्रांसफार्मर को गाड़ी पर लदवा कर आ रहे थे। उन्होंने ट्रांसफार्मर लदी गाड़ी को गांव दक्षिण खड़ा करा दिया और खुद कपड़ा बदलने घर चले गए। कुछ समय बाद वह पिता हीरालाल के साथ घर से चले। जैसे ही आनंद शंकर राय और उनके पिता हीरालाल वापस लौटते समय सत्येंद्र राय पुत्र उदयशंकर राय के दरवाजे पर पहुंचे थे कि पहले से सत्येंद्र राय और उनके भाई जीतेंद्र राय खड़े थे। सत्येंद्र राय ने अपनी बंदूक लाकर भाई जीतेंद्र को देते हुए आनंद शंकर को गोली मारने के लिए ललकारा।
जीतेंद्र ने बंदूक से कई फायरिंग की। एक गोली आनंद शंकर राय के सीने में लगी जिससे वह घायल हो गए। फायरिंग की आवाज सुनकर लोग मौके पर पहुंचे। आनंद शंकर राय का इलाज जिला अस्पताल में किया गया। तहरीर के आधार पर हत्या प्रयास का मामला सत्येंद्र और जीतेंद्र राय के विरुद्ध दर्ज हुआ। विचारण के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने नौ गवाहों को पेश किया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने दोनों अभियुक्तों को हत्या का प्रयास का दोषी पाते हुए दोनों को सात-सात साल के सश्रम कारावास और 40-40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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भांवरकोल थाना क्षेत्र के सियाड़ी गांव निवासी हीरालाल राय पुत्र रामलखन राय ने दो सितंबर 2004 को भांवरकोल थाने में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि सुबह आठ बजे उनका पुत्र आनंद शंकर राय जले हुए ट्रांसफार्मर को गाड़ी पर लदवा कर आ रहे थे। उन्होंने ट्रांसफार्मर लदी गाड़ी को गांव दक्षिण खड़ा करा दिया और खुद कपड़ा बदलने घर चले गए। कुछ समय बाद वह पिता हीरालाल के साथ घर से चले। जैसे ही आनंद शंकर राय और उनके पिता हीरालाल वापस लौटते समय सत्येंद्र राय पुत्र उदयशंकर राय के दरवाजे पर पहुंचे थे कि पहले से सत्येंद्र राय और उनके भाई जीतेंद्र राय खड़े थे। सत्येंद्र राय ने अपनी बंदूक लाकर भाई जीतेंद्र को देते हुए आनंद शंकर को गोली मारने के लिए ललकारा।
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जीतेंद्र ने बंदूक से कई फायरिंग की। एक गोली आनंद शंकर राय के सीने में लगी जिससे वह घायल हो गए। फायरिंग की आवाज सुनकर लोग मौके पर पहुंचे। आनंद शंकर राय का इलाज जिला अस्पताल में किया गया। तहरीर के आधार पर हत्या प्रयास का मामला सत्येंद्र और जीतेंद्र राय के विरुद्ध दर्ज हुआ। विचारण के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने नौ गवाहों को पेश किया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने दोनों अभियुक्तों को हत्या का प्रयास का दोषी पाते हुए दोनों को सात-सात साल के सश्रम कारावास और 40-40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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