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हत्या के प्रयास में चार को दस साल का कारावास
Updated Tue, 17 Apr 2018 11:04 PM IST
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गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजीव कुमार सिन्हा की अदालत में मंगलवार को चार साल पहले की गई हत्या के प्रयास के लंबित मामले में सुनवाई की गई। इस प्रकरण में चार अभियुक्तों को दोषी पाते हुए दस साल का कारावास तथा 12-12 हजार रुपये अर्थ दंड से दंडित किया गया।
बरेसर थाना क्षेत्र के भोपतपुर गांव के रहने वाले रामकृत राजभर पुत्र स्व. रूपचंद राजभर ने थाने में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज करायी थी कि उसका लड़का दस अप्रैल 2014 को रात्रि में अक्षर राजभर के घर के सामने हैंडपंप के पास सोया था कि रात्रि में करीब एक बजे उसके लड़के को गांव के पिंटू राजभर पुत्र मंगला राजभर हाथ में कुल्हाड़ी लेकर उस पर प्रहार कर रहा था उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर पिंटू राजभर पश्चिम की तरफ भागा उसके साथ तीन और व्यक्ति थे जिन्हें वह पहचान नहीं सका उसके लड़के अक्षर राजभर के सिर पर काफी चोटें आई थीं और वह लहूलुहान हो गया था। उसके शरीर पर भी धारदार हथियार से किए गए चोट के निशान थे। उसे मऊ अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे गाजीपुर सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। सदर अस्पताल गाजीपुर से वाराणसी के लिए रेफर कर दिया, जहां उसका इलाज अलकनंदा हॉस्पिटल में हो रहा है। पीड़ित पक्ष की तहरीर के आधार पर धारा 324 और 308 भादवि के तहत बड़ेसर थाने में पिंटू राजभर और तीन अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना के दौरान गांव के ही रामअवतार राजभर पुत्र झब्बर राम, अवध राजभर पुत्र खेदू राजभर और सूर्य बलि राजभर पुत्र खेदू राजभर का नाम प्रकाश में आया। चारों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों ने घटना का समर्थन किया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता की तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने चारों अभियुक्तों को धारा 307, 324 और 325 भादवि के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई। अदालत ने अर्थदंड की धनराशि की आधी रकम पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया है।
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बरेसर थाना क्षेत्र के भोपतपुर गांव के रहने वाले रामकृत राजभर पुत्र स्व. रूपचंद राजभर ने थाने में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज करायी थी कि उसका लड़का दस अप्रैल 2014 को रात्रि में अक्षर राजभर के घर के सामने हैंडपंप के पास सोया था कि रात्रि में करीब एक बजे उसके लड़के को गांव के पिंटू राजभर पुत्र मंगला राजभर हाथ में कुल्हाड़ी लेकर उस पर प्रहार कर रहा था उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर पिंटू राजभर पश्चिम की तरफ भागा उसके साथ तीन और व्यक्ति थे जिन्हें वह पहचान नहीं सका उसके लड़के अक्षर राजभर के सिर पर काफी चोटें आई थीं और वह लहूलुहान हो गया था। उसके शरीर पर भी धारदार हथियार से किए गए चोट के निशान थे। उसे मऊ अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे गाजीपुर सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। सदर अस्पताल गाजीपुर से वाराणसी के लिए रेफर कर दिया, जहां उसका इलाज अलकनंदा हॉस्पिटल में हो रहा है। पीड़ित पक्ष की तहरीर के आधार पर धारा 324 और 308 भादवि के तहत बड़ेसर थाने में पिंटू राजभर और तीन अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना के दौरान गांव के ही रामअवतार राजभर पुत्र झब्बर राम, अवध राजभर पुत्र खेदू राजभर और सूर्य बलि राजभर पुत्र खेदू राजभर का नाम प्रकाश में आया। चारों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों ने घटना का समर्थन किया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता की तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने चारों अभियुक्तों को धारा 307, 324 और 325 भादवि के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई। अदालत ने अर्थदंड की धनराशि की आधी रकम पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया है।
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