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मारपीट के मामले में चार को एक वर्ष का कारावास
Updated Sat, 17 Mar 2018 11:44 PM IST
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गाजीपुर।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदकुमार की अदालत ने शादियाबाद थाना क्षेत्र के अड़िला गांव में हुए मारपीट के मामले में चार अभियुक्तों को एक एक वर्ष की कारावास और दो- दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड की राशि परिवादी को एक माह के अंदर देने का आदेश दिया है। मालूम हो कि शादियाबाद थाना क्षेत्र अड़िला गांव निवासी अजय कुमार दूबे पुत्र मंगला दूबे ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराया कि बीते 15 मार्च वर्ष 2006 की शाम साढ़े 5 बजे वह अपने पंप सेट पर थे। इसी दौरान गांव के देवचंद, घूरमूल, शिवचंद और मोहन लाठी डंडे से लैस होकर आए और गाली देते हुए मार-मारकर घायल कर दिए। जान से मारने की धमकी देते हुए चले गए। रिपोर्ट पर थाने में कोई कार्रवाई ना होने पर पुलिस अधीक्षक को पत्र परिवादी द्वारा दिया गया। वहां भी कोई कार्यवाई नहीं होने पर पीड़ित ने पत्र परिवार न्यायालय में प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान अदालत ने वादी पक्ष और बचाव पक्ष की बात को सुनने के बाद चारों आरोपियों को धारा 323 और 504 के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई। अभियुक्त मोहन निर्णय के समय न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। जिस कारण अदालत ने उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदकुमार की अदालत ने शादियाबाद थाना क्षेत्र के अड़िला गांव में हुए मारपीट के मामले में चार अभियुक्तों को एक एक वर्ष की कारावास और दो- दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड की राशि परिवादी को एक माह के अंदर देने का आदेश दिया है। मालूम हो कि शादियाबाद थाना क्षेत्र अड़िला गांव निवासी अजय कुमार दूबे पुत्र मंगला दूबे ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराया कि बीते 15 मार्च वर्ष 2006 की शाम साढ़े 5 बजे वह अपने पंप सेट पर थे। इसी दौरान गांव के देवचंद, घूरमूल, शिवचंद और मोहन लाठी डंडे से लैस होकर आए और गाली देते हुए मार-मारकर घायल कर दिए। जान से मारने की धमकी देते हुए चले गए। रिपोर्ट पर थाने में कोई कार्रवाई ना होने पर पुलिस अधीक्षक को पत्र परिवादी द्वारा दिया गया। वहां भी कोई कार्यवाई नहीं होने पर पीड़ित ने पत्र परिवार न्यायालय में प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान अदालत ने वादी पक्ष और बचाव पक्ष की बात को सुनने के बाद चारों आरोपियों को धारा 323 और 504 के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई। अभियुक्त मोहन निर्णय के समय न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। जिस कारण अदालत ने उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है।