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मारपीट के आरोपियों पर गुंडा एक्ट और जिला बदर की कार्रवाई
Updated Wed, 28 Nov 2018 11:27 PM IST
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मरदह(गाजीपुर)। मरदह ब्लाक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी कंचन कुमार जायसवाल से मारपीट करना पूर्व कोटेदार जितेंद्र राम को महंगा पड़ गया। जिलाधिकारी के बालाजी ने उसे एवं उसके दोनों पुत्रों को गुंडा एक्ट में निरुद्ध करते हुए जिला बदर का आदेश दिया है। प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई से ऐसे अराजकतत्व सहम गए हैं, जो आए दिन कर्मचारियों से मारपीट करते हैं।
वर्ष 2016 में राशन वितरण में अनियमितता की शिकायत पर ग्राम पंचायत अधिकारी कंचन कुमार जायसवाल पर विकास खंड मरदह के ग्रामसभा चौराबोझ के तत्कालीन कोटेदार जितेंद्र राम के यहां जांच करने के लिए पहुंचे थे। इस बीच कोटेदार जितेंद्र राम ने परिवार के लोगों के साथ उन पर जानलेवा हमला कर दिया था। घटना के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी संजय खत्री के निर्देश पर नोनहरा थाना में पंचायत अधिकारी कंचन जायसवाल ने मुकदमा दर्ज कराया था एवं जांचोपरांत उपजिलाधिकारी ने जितेंद्र की राशन की दुकान निरस्त कर दी थी। जितेंद्र राम के कृत्यों को देखते हुए थानाध्यक्ष की रिपोर्ट पर पुलिस कप्तान ने जितेंद्र राम एवं उसके पुत्रों पर धारा 3/4 उप्र गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के अंतर्गत कार्रवाई किए जाने के लिए बल दिया था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जितेंद्र राम और उसके दोनों पुत्रों को गुंडा एक्ट में निरुद्ध करते हुए जिला बदर का आदेश दिया।
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वर्ष 2016 में राशन वितरण में अनियमितता की शिकायत पर ग्राम पंचायत अधिकारी कंचन कुमार जायसवाल पर विकास खंड मरदह के ग्रामसभा चौराबोझ के तत्कालीन कोटेदार जितेंद्र राम के यहां जांच करने के लिए पहुंचे थे। इस बीच कोटेदार जितेंद्र राम ने परिवार के लोगों के साथ उन पर जानलेवा हमला कर दिया था। घटना के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी संजय खत्री के निर्देश पर नोनहरा थाना में पंचायत अधिकारी कंचन जायसवाल ने मुकदमा दर्ज कराया था एवं जांचोपरांत उपजिलाधिकारी ने जितेंद्र की राशन की दुकान निरस्त कर दी थी। जितेंद्र राम के कृत्यों को देखते हुए थानाध्यक्ष की रिपोर्ट पर पुलिस कप्तान ने जितेंद्र राम एवं उसके पुत्रों पर धारा 3/4 उप्र गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के अंतर्गत कार्रवाई किए जाने के लिए बल दिया था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जितेंद्र राम और उसके दोनों पुत्रों को गुंडा एक्ट में निरुद्ध करते हुए जिला बदर का आदेश दिया।
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