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चार साल बाद फिर जिला जेल हुआ अशांत

Fri, 17 Aug 2018 01:28 AM IST
Updated Fri, 17 Aug 2018 01:28 AM IST
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चार साल बाद फिर जिला जेल हुआ अशांत
गाजीपुर। जिला जेल अपने करमानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहा है। चार वर्ष पहले जेल के बैरक नंबर तीन में चेकिंग के दौरान मोबाइल मिलने से जेल प्रशासन और बंदी रक्षकों के बीच गुरिल्ला युद्ध हुआ था। बंदियों ने प्रभारी जेलर पर हमला बोलते हुए जमकर पथवार किया था। उन्हें काबू में करने के लिए बंदी रक्षकों द्वारा की गई फायरिंग में गोली लगने से एक बंदी की मौत हो गई थी। जबकि पथराव में छह बंदी रक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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14 फरवरी 2014 की शाम करीब पौने छह बजे प्रभारी जेलर को सूचना मिली थी कि बैरक नंबर-तीन में एक बंदी मोबाइल पर किसी से बात कर रहा है। इस पर वह चेकिंग करने बैरक में पहुंच गए। इस दौरान उन्हें स्विच बोर्ड में एक चार्जर लगा दिखाई दिया, जिसे तोड़ कर उन्होंने फेंक दिया था। यह बात बैरक में मौजूद बंदियों को नागवार गुजरी थी और वह प्रभारी जेलर से भिड़ गए थे। कहासुनी इस कदर बढ़ी थी कि बंदियों ने प्रभारी पर हमला कर उनका सिर फोड़ दिया था। यह देख बंदी रक्षक अवनींद्र सिंह तथा राजेश उपाध्याय ने प्रभारी जेलर को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन आक्रोशित बंदियों ने उनकी भी पिटाई शुरू कर दी थी। इसी बीच बैरकों में जा रहे सभी बंदी लामबंद हो गए थे। उनके आक्रोश को देख प्रभारी जेलर और बंदी रक्षक बचाओ-बचाओ की आवाज लगाने लगे थे। बंदी रक्षकों को जब लगा कि बंदी जेल अधिकारियों की जान ले लेंगे तो उन्होंने हवाई फायरिंग शुरू कर दी थी। गोलियां ताबड़तोड़ चलने से जेल पूरी तरह से थर्रा उठी थी और आसपास भी गोली की आवाज गूंजने लगी थी। बंदी विश्वनाथ पुत्र रामवृक्ष निवासी मुड़वल थाना नंदगंज के जांघ में गोली जा लगी थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इससे बंदी और उग्र हो गए थे और घंटों जेल में पथराव तथा तोड़फोड़ किया था। प्रभारी जेलर के कार्यालय में घुस कर कंप्यूटर, टीवी, कुर्सी, मेज को तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया। कई महत्वपूर्ण अभिलेख भी फाड़ कर फेेंक दिया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। बाद में घायल बंदी विश्वनाथ की मौत हो गई थी। पुलिस अधीक्षक की जांच में बंदी विश्वनाथ प्रजापति को गोली मारने में बंदी रक्षक अनुपम सोनकर को दोषी पाया गया था। पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। पथराव में प्रधान बंदी रक्षक छेदी लाल सरोज, बंदी रक्षक एखलाक अहमद, घनराज पाल, जेपी सिंह आदि घायल हो गए थे।
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