{"_id":"5a96e90f4f1c1b462c8bab8b","slug":"171519839503-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आग से तीन रिहायशी झोपड़ी जलकर राख","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आग से तीन रिहायशी झोपड़ी जलकर राख
Updated Wed, 28 Feb 2018 11:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुहवल (गाजीपुर)।
थाना क्षेत्र के सरैया गांव में मंगलवार की रात रहस्यमय परिस्थितियों में आग लगने से तीन रिहायशी झोपड़ी जलकर राख हो गई। आग में हजारों रुपये के घर-गृहस्थी का सामान जलकर स्वाहा हो गया। झोपड़ी में रखा हजारों रुपये नगदी भी जल गया। यहां तक की मृत परिजनों को दाने के लिए मोहताज होना पड़ रहा है। आग से मची तबाही के बाद जानवरों के चारे के लाले पड़ गए हैं।
इलाके सरैया गांव निवासी शंभू पुत्र पलकू बिंद जो ईंट भट्टे पर रहकर अपने परिवार का किसी तरह पेट भरते हैं। मंगलवार की रात उनकी पत्नी एवं बच्चे भोजन के उपरांत सोने चले गए। इसी बीच रात्रि को लगभग दस बजे अचानक उनकी झोपड़ी से धुआं निकलने लगा। जिससे बगल के लोगों ने सोचा कि शायद खाना बन रहा होगा। तभी झोपड़ी में सोए लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कत होने लगी। इसी बीच, शंभू की पत्नी की नींद खुल गई वह चारपाई से हड़बड़ा कर उठी। देखा की झोपड़ी के अंदर धुआं भरा हुआ है। बात समझते देर नहीं लगी वह किसी तरह बच्चे और जानवरों को बाहर निकाली। इसी बीच, झोपड़ी में आग की लपटें उठने लगी। देखते ही देखते एक-एक कर तीन झोपड़ियां राख में तब्दील हो गई। उधर, शोर सुनकर आसपास के लोगों ने किसी तरह आग बुझाने का काफी प्रयास किया लेकिन निजी नलकूप, हैंडपंप एवं अन्य संसाधनों से जब तक आग पर काबू पाया जाता, सब कुछ जलकर नष्ट हो गया। आग से तबाह होने के बाद पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। घटना के वक्त शंभू बिंद घर पर मौजूद नहीं था। सूचना मिलने के बाद ईंट भट्ठे बुधवार की सुबह वह घर पहुंचा। अपने जले हुए आशियाने को देखकर वह फूट-फूटकर रोने लगा। घटना की सूचना ग्रामीणों ने राजस्व कर्मियों सहित उच्चाधिकारियों को दे दी है।
विज्ञापन
थाना क्षेत्र के सरैया गांव में मंगलवार की रात रहस्यमय परिस्थितियों में आग लगने से तीन रिहायशी झोपड़ी जलकर राख हो गई। आग में हजारों रुपये के घर-गृहस्थी का सामान जलकर स्वाहा हो गया। झोपड़ी में रखा हजारों रुपये नगदी भी जल गया। यहां तक की मृत परिजनों को दाने के लिए मोहताज होना पड़ रहा है। आग से मची तबाही के बाद जानवरों के चारे के लाले पड़ गए हैं।
इलाके सरैया गांव निवासी शंभू पुत्र पलकू बिंद जो ईंट भट्टे पर रहकर अपने परिवार का किसी तरह पेट भरते हैं। मंगलवार की रात उनकी पत्नी एवं बच्चे भोजन के उपरांत सोने चले गए। इसी बीच रात्रि को लगभग दस बजे अचानक उनकी झोपड़ी से धुआं निकलने लगा। जिससे बगल के लोगों ने सोचा कि शायद खाना बन रहा होगा। तभी झोपड़ी में सोए लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कत होने लगी। इसी बीच, शंभू की पत्नी की नींद खुल गई वह चारपाई से हड़बड़ा कर उठी। देखा की झोपड़ी के अंदर धुआं भरा हुआ है। बात समझते देर नहीं लगी वह किसी तरह बच्चे और जानवरों को बाहर निकाली। इसी बीच, झोपड़ी में आग की लपटें उठने लगी। देखते ही देखते एक-एक कर तीन झोपड़ियां राख में तब्दील हो गई। उधर, शोर सुनकर आसपास के लोगों ने किसी तरह आग बुझाने का काफी प्रयास किया लेकिन निजी नलकूप, हैंडपंप एवं अन्य संसाधनों से जब तक आग पर काबू पाया जाता, सब कुछ जलकर नष्ट हो गया। आग से तबाह होने के बाद पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। घटना के वक्त शंभू बिंद घर पर मौजूद नहीं था। सूचना मिलने के बाद ईंट भट्ठे बुधवार की सुबह वह घर पहुंचा। अपने जले हुए आशियाने को देखकर वह फूट-फूटकर रोने लगा। घटना की सूचना ग्रामीणों ने राजस्व कर्मियों सहित उच्चाधिकारियों को दे दी है।
विज्ञापन