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किशोर की हत्या व लाश छुपाने में एक को उम्रकैद
Updated Thu, 16 Nov 2017 12:26 AM IST
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अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्रितीय अजय पाल सिंह की अदालत ने भांवरकोल थाना क्षेत्र के कबीरपुर कला गांव में सात साल पहले किशोर की हत्या के मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास और पंद्रह हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई है।
भांवरकोल थाने के कबीरपुर कला निवासी अवधेश उपाध्याय ने थाने में तहरीर दी थी कि 11 जुलाई 2010 को सायंकाल उनका नाबालिक बेटा संजीव उर्फ प्रियांशु घर से डीटीएच ठीक कराने के लिए गया था। उसने बताया था कि वह मुहम्मद जन्नत हुसैन के यहां जा रहा है। रास्ते में उसे अंतिम बार गिरजा चौधरी पुत्र घुरा चौधरी के द्वारा देखा गया था। गिरजा के द्वारा पूछने पर बालक ने बताया था कि जन्नत के घर जा रहे हैं। रात साढ़े सात बजे जब बच्चे को ट्यूशन पढ़ाने अध्यापक आए तो उसकी तलाश होने लगी। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कहीं अतापता नहीं चला। दूसरे दिन जब गांव के लोग खेत की तरफ गए, तो देखा कि संजीव उपाध्याय का शव मुहम्मद के खेत में नग्न हालत में पड़ा था। उसका कपड़ा जन्नत के घर के पीछे झाड़ी के पास नीम के पेड़ के नीचे गड्ढ़े में पड़ा था। पेड़ के आस-पास शव को घसीटने का निशान भी पाया गया था। उसके गले पर चोट के निशान और मुंह से खून निकला था। इसके अलावा उसका हाथ भी टूटा हुआ था। इस मामले में थाने में हत्या कर शव छिपाने व दूराचार की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। विवेचना के बाद कृष्णा गुप्ता पुत्र विजय शंकर गुप्ता का नाम भी प्रकाश में आया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दस गवाह पेश किए गए। सहायक शासकीय अधिवक्ता दयाशंकर कुशवाहा एवं बचाव पक्ष की बहस को सुनने के बाद अदालत नें कृष्णा गुप्ता को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया और जन्नत हुसैन को धारा 302 में आजीवन कारावास और दस हजार रुपया अर्थदंड तथा धारा 201 में सात वर्ष सश्रम कारावास और पांच हजार अर्थदंड की सजा सुनाई।
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भांवरकोल थाने के कबीरपुर कला निवासी अवधेश उपाध्याय ने थाने में तहरीर दी थी कि 11 जुलाई 2010 को सायंकाल उनका नाबालिक बेटा संजीव उर्फ प्रियांशु घर से डीटीएच ठीक कराने के लिए गया था। उसने बताया था कि वह मुहम्मद जन्नत हुसैन के यहां जा रहा है। रास्ते में उसे अंतिम बार गिरजा चौधरी पुत्र घुरा चौधरी के द्वारा देखा गया था। गिरजा के द्वारा पूछने पर बालक ने बताया था कि जन्नत के घर जा रहे हैं। रात साढ़े सात बजे जब बच्चे को ट्यूशन पढ़ाने अध्यापक आए तो उसकी तलाश होने लगी। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कहीं अतापता नहीं चला। दूसरे दिन जब गांव के लोग खेत की तरफ गए, तो देखा कि संजीव उपाध्याय का शव मुहम्मद के खेत में नग्न हालत में पड़ा था। उसका कपड़ा जन्नत के घर के पीछे झाड़ी के पास नीम के पेड़ के नीचे गड्ढ़े में पड़ा था। पेड़ के आस-पास शव को घसीटने का निशान भी पाया गया था। उसके गले पर चोट के निशान और मुंह से खून निकला था। इसके अलावा उसका हाथ भी टूटा हुआ था। इस मामले में थाने में हत्या कर शव छिपाने व दूराचार की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। विवेचना के बाद कृष्णा गुप्ता पुत्र विजय शंकर गुप्ता का नाम भी प्रकाश में आया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दस गवाह पेश किए गए। सहायक शासकीय अधिवक्ता दयाशंकर कुशवाहा एवं बचाव पक्ष की बहस को सुनने के बाद अदालत नें कृष्णा गुप्ता को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया और जन्नत हुसैन को धारा 302 में आजीवन कारावास और दस हजार रुपया अर्थदंड तथा धारा 201 में सात वर्ष सश्रम कारावास और पांच हजार अर्थदंड की सजा सुनाई।
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