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Ghazipur News: पोर्टल के जरिए गो आश्रय स्थलों पर रहेगी नजर
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गोशालाओं की व्यवस्थाओं की निगरानी अब हाई तकनीक से की जाएगी। जिसमें भूसा एवं चारे खरीदने से लेकर पशुओं की मौत तक की जानकारियां पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इसके मद्देनजर गो आश्रय ऐप और पोर्टल संचालन के लिए पशुपालन विभाग के कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पशुपालन विभाग के मुताबिक, शासन स्तर पर गो आश्रय स्थलों की निगरानी के लिए अब पोर्टल एवं एप के माध्यम से किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि जिले में वर्तमान में तीन स्थायी एवं 34 अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। पशु आश्रय स्थलों में करीब 4641 पशु रखे गए है। वहीं गो आश्रय स्थल पोर्टल के शुरू होने से अब गोवंश संबंधित सभी आंकडे़ आनलाइन हो जाएगे।
गोशालाओं में पशुओं की संख्या, भूसे- चारे की व्यवस्था, पशुओं की बीमारी एवं मौत, टीकाकरण आदि जानकारियां पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। विभाग का मानना है कि पोर्टल पर आंकडे़ दर्ज होने से गो आश्रय स्थलों की स्थिति में सुधार होगा। साथ ही किसी प्रकार की अनियमितता पर रोक लग सकेगी। इस बारे में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी एसके रावत ने बताया क्रि शासन के ओर से गो आश्रय पोर्टल और एप के माध्यम से गोवंशों पर नजर रखी जाएगी और वहीं गो आश्रय पोर्टल पर सभी आंकडे़ दर्ज होंगे।
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पशुपालन विभाग के मुताबिक, शासन स्तर पर गो आश्रय स्थलों की निगरानी के लिए अब पोर्टल एवं एप के माध्यम से किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि जिले में वर्तमान में तीन स्थायी एवं 34 अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। पशु आश्रय स्थलों में करीब 4641 पशु रखे गए है। वहीं गो आश्रय स्थल पोर्टल के शुरू होने से अब गोवंश संबंधित सभी आंकडे़ आनलाइन हो जाएगे।
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गोशालाओं में पशुओं की संख्या, भूसे- चारे की व्यवस्था, पशुओं की बीमारी एवं मौत, टीकाकरण आदि जानकारियां पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। विभाग का मानना है कि पोर्टल पर आंकडे़ दर्ज होने से गो आश्रय स्थलों की स्थिति में सुधार होगा। साथ ही किसी प्रकार की अनियमितता पर रोक लग सकेगी। इस बारे में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी एसके रावत ने बताया क्रि शासन के ओर से गो आश्रय पोर्टल और एप के माध्यम से गोवंशों पर नजर रखी जाएगी और वहीं गो आश्रय पोर्टल पर सभी आंकडे़ दर्ज होंगे।
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