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कोर्ट में मामला लंबित, अधर में लटक सकती है परियोजना

Thu, 10 Sep 2020 11:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2020 11:33 PM IST
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Court case pending, project may hang in the balance
सुहवल। जिलाधिकारी न्यायालय में अधिग्रहीत जमीन का मामला करीब एक वर्ष से लंबित है। अब तक कोई निर्णय नहीं होने से ताड़ीघाट-मऊ रेलखंड परियोजना के अधर में लटकने की आशंका बढ़ गई है। आर्बिटेशन के लंबित मामले को लेकर रेलवे के अधिकारियों ने पीएमओ कार्यालय, यूपी के मुख्य सचिव सहित रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को इसके जल्द समाधान के लिए पत्र लिखा है, जिससे परियोजना को निर्धारित समय से पूरा किया जा सके।
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ताड़ीघाट- मऊ रेलखंड विस्तारिकरण को लेकर पहले चरण में दो तहसील जमानिया एवं सदर के 17 गांव के 2780 किसानों की भूमि प्रभावित हो रही है। इसमें कुछ किसानों के द्वारा पिछले वर्ष सर्किल रेट में असमानता को लेकर जिलाधिकारी न्यायालय में आर्बिटेशन दाखिल किया गया था, लेकिन अभी तक एक वर्ष बाद भी इस मामलें में कोई निर्णय न होने से यह परियोजना प्रभावित होने की संभावन बढ़ गई है। हालांकि अन्य जगहों पर जहां जमीन संबंधित विवाद / लैंड इश्यू नहीं है, वहां काम जारी है। आर्बिटेशन के लंबित मामले को लेकर रेलवे के अधिकारियों ने पीएमओ कार्यालय और यूपी के मुख्य सचिव सहित रेलवे बोर्ड के आलाधिकारियों को इसके जल्द समाधान के लिए पत्र लिखा है, जिससे परियोजना को निर्धारित समय से पूरा किया जा सके। मालूम हो कि पिछले दिनों परियोजना के निरीक्षण के लिए आए आरबीएनएल के मुख्य परियोजना प्रबंधक विकास चंद्रा और निदेशक सत्यम् कुमार ने कैंप कार्यालय में कार्यदायी संस्था के अधिकारियों और इंजीनियरों से गहनतापूर्वक विचार विमर्श किया था, जिसमें अभी तक आर्बिटेशन के मामले में कोई निर्णय न होने से निराशा जाहिर की थी। निरीक्षण करने आए अधिकारियों ने कहा था कि संबंधित जमीनों के आर्बिटेशन का निर्णय न होने से वहां किसी तरह का निर्माण नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण परियोजना पर असर पड़ने की संभावना है। इस संबंध में आरबीएनएल के मुख्य परियोजना प्रबंधक विकास चंद्रा ने बताया कि आर्बिटेशन के मामले में अभी तक कोई निर्णय सक्षम न्यायालय के द्वारा नहीं दिया गया है, जिसके कारण परियोजना पर असर पड़ रहा है। इसको लेकर पीएमओ कार्यालय समेत उच्चाधिकारियों के यहां पत्राचार किया जा रहा है, जिससे समाधान जल्द हो सके।
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