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Ghazipur News: कफ सिरप तस्करी के आरोपी सर्वांश वर्मा की जमानत निरस्त, भोला जायसवाल की भी हुई पेशी

Tue, 06 Jan 2026 11:44 PM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Tue, 06 Jan 2026 11:44 PM IST
सार

गाजीपुर में कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले में आरोपी सर्वांश वर्मा की जमानत निरस्त कर दी गई। न्यायाधीश ने कहा कि अगर जमानत पर रिहा होता है आरोपी तो विवेचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
 

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Cough syrup smuggling accused Sarvansh Verma bail cancelled in ghazipur
भोला जायसवाल की हुई पेशी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट और अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह की अदालत ने मंगलवार को कफ सिरप तस्करी के मामले में जेल में बंद आरोपी सर्वांश वर्मा की जमानत अर्जी निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी जमानत पर रिहा होता है तो विवेचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही अदालत खाद्य व औषधि प्रशासन एवं राज्यकर के अधिकारियों की निष्क्रियता मानी। कोर्ट ने आदेश की प्रति राज्यकर विभाग के अपर मुख्य सचिव और खाद्य व औषधि प्रशासन के प्रमुख सचिव और आयुक्त को भेजने का आदेश दिया है। वहीं, सोनभद्र जिला कारागार से अए आरोपी भोला जायसवाल की भी पेशी हुई। सुनवाई के बाद पुलिस उसे लेकर सोनभद्र लौट गई।
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आरोपी सर्वांश वर्मा अदालत ने जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि जो ई-बिल जारी हुए हैं, उन पर किसी भी वाहन स्वामी अथवा चालक की रिसीविंग नहीं है। जिन वाहनों से माल ले जाना बताया गया है, उन वाहन स्वामियों के बयान विवेचक ने दर्ज किए हैं। उन्होंने किसी भी प्रकार का माल ले जाने से इंकार किया है। विवेचना के दौरान कुछ बिल मिले हैं, जो प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हो रहे हैं।
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आरोपी की फर्म से विभिन्न तिथियों पर करीब दो करोड़ रुपये कोडीनयुक्त सिरप के नाम पर स्थानांतरित किए गए हैं। विवेचक ने राज्यकर विभाग से जो प्रपत्र प्राप्त किया है, उसमें भी अलग-अलग वाहनों से एक ही तिथि पर भारी मात्रा में कफ सिरप की आपूर्ति बताई गई है। साक्ष्य को देखते हुए आरोपी सर्वांश वर्मा के खिलाफ मामला बनता है। इसलिए अगर आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो विवेचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी निरस्त कर दी।

न्यायालय ने माना नशे के लिए डायवर्ट हुआ सिरप

न्यायालय ने कहा कि कोडीनयुक्त कफ सिरप को नशे के लिए डायवर्ट किया गया, बोगस फर्माें के नाम पर कूटरचित मांगपत्र जारी किए गए और कूटरचित ई-वे बिल आदि तैयार गए। वाहनों के फर्जी नंबर डालकर परिवहन किया गया है। यह सभी तथ्य ऐसी प्रकृति के हैं, जिनके आधार पर जमानत देने का कोई आधार नहीं है।

विवेचना में आ सकती है ट्रांजेक्शन के निरीक्षण के जिम्मेदारों की भूमिका
न्यायालय ने कहा कि वर्ष 2024 में शासन से सभी सहायक आयुक्त औषधि, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और सभी औषधि निरीक्षक को आदेश जारी किया था। इसके अनुपालन का दायित्व खाद्य एवं औषधि प्रशासन सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का था। शासनादेश के बाद भी बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन करते हुए कोडीनयुक्त कफ सिरप का विक्रय जिस प्रकार से किया जाना मामले की गंभीरता को बढ़ाता है। फर्जी ई-बिल तैयार हो रहे थे और फर्जी फर्माें के आधार पर ट्रांजेक्शन हो रहे थे, लेकिन राज्यकर विभाग के अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। न्यायालय ने कहा कि जो विभाग ट्रांजेक्शन के निरीक्षण के जिम्मेदार थे, विवेचना में उनकी भी भूमिका दायरे में आ सकती है।
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