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चार विकासखंडों में शुरू नहीं हुआ छात्रावास का निर्माण कार्य

Fri, 29 Oct 2021 11:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Oct 2021 11:21 PM IST
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Construction of hostels hanging in limbo in four development blocks
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं को इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्रदान की जाी है। इसके लिए दस ब्लाकों में स्थित इन विद्यालयों के परिसर या उसके आसपास छात्रावास का निर्माण कराया जाना है। कासिमाबाद, मरदह, सैदपुर, जखनिया में छात्रावास का निर्माण शुरू हो गया है लेकिन रेवतीपुर, जमानिया, सादात एवं देवकली में निर्माण अभी शुरू नहीं हो सका है। कहीं जलभराव तो कहीं जर्जर भवन को नहीं गिराए जाने के कारण काम रुका हुआ है।
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जिले के 16 में 14 ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हैं। इनमें कक्षा छह से आठ तक की छात्राओं को मुफ्त आवासीय शिक्षा दी जा रही है। आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद रहने की समस्या होने के कारण कई छात्राएं आगे की शिक्षा से वंचित रह जाती थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए अब यहां इंटर तक की शिक्षा दी जानी है। इसके तहत जिले के दस विकासखंडों में स्थित विद्यालयों के परिसर में छात्रावास का निर्माण कराया जाना है। इनमें तीन ब्लाकों में छात्रावास के साथ एकेडमिक ब्लाक भी बनेंगे। मरदह, जमानिया, सैदपुर, रेवतीपुर, सादात, देवकली, बाराचवर, कासिमाबाद, जखनिया एवं सदर में छात्रावास बनने हैं। एक करोड़ 77 लाख की लागत से प्रत्येक छात्रावास बनने हैं जबकि लगभग तीन करोड़ चार लाख से छात्रावास एवं एकेडमिक ब्लाक दोनों का निर्माण होना है।
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कासिमाबाद, मरदह, सैदपुर, जखनिया में छात्रावास का निर्माण कार्य शुरू हो गया है जबकि रेवतीपुर, जमानिया, सादात एवं देवकली में निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है। रेवतीपुर के बीईओ अशोक कुमार ने बताया कि जहां हास्टल बनना है वहां स्थित जर्जर भवन को ध्वस्त कराने के बाद निर्माण का कार्य शुरू होगा। बाराचवर एवं सदर में जमीन नहीं मिली है।
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विद्यालयों में हैं सौ-सौ सीटें
जिले में शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े जिन चौदह ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय खोले गए हैं वहां महिला साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत दर से कम है। जेंडर गैप राष्ट्रीय औसत दर से अधिक है। दो ब्लाकों भदौरा और करंडा में बालिकाओं की साक्षरता दर अधिक होने के कारण यहां पर यह विद्यालय नहीं खोले गए हैं। इन विद्यालयों में सौ-सौ सीटें निर्धारित की गई हैं। इसमें 75 प्रतिशत सीट पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के प्रवेश के लिए निर्धारित है। जबकि 25 प्रतिशत सीटें सामान्य वर्ग की गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की बालिकाओं के प्रवेश के लिए है।

सादात में जलभराव, देवकली में निर्माण स्थल पर वन विभाग की लकड़ी रखे जाने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। रेवतीपुर और जमानिया में निर्माण स्थल पर स्थित जर्जर भवन को ध्वस्त करने के बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।- हरिश्चंद्र यादव, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा।
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