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Ghazipur News: ब्रांडनेम जमदग्नि जैविक उत्पाद पर दी सहमति

Wed, 14 Dec 2022 05:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 14 Dec 2022 05:00 AM IST
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Consent on brand name Jamdagni organic product
नमामि गंगे परियोजना के तहत जैविक खेती योजना को लेकर पांच विकास खंडों के 102 कलस्टरों में 3638 कृषकों का चयन कर 2040 हेक्टेयर में खेती की जा रही है। इसको लेकर यूपी डास्प के तहत शासी समिति की बैठक कलेक्ट्रेट कार्यालय कक्ष में जिलाधिकारी आर्यका अखौरी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में ब्रांड नेम जमदग्नि जैविक उत्पाद के नाम पर सहमति बनी।
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योजना के प्रथम वर्ष में जैविक खेती के लिए प्रमाणीकरण संस्था द्वारा 3638 कृषकों को पीजीएस ग्रीन प्रमाण पत्र निर्गत किया गया है। साथ ही जैविक खेती में किए गए कार्यों व निवेश की प्रोत्साहन धनराशि का भुगतान कर दिया गया है। द्वितीय वर्ष एवं तृतीय वर्ष के खरीफ के कार्यों एवं निवेश की प्रोत्साहन धनराशि मुख्यालय से बजट प्राप्त नहीं होने के कारण बकाया है। तृतीय वर्ष में खरीफ फसलों की जैविक खेती के मापदंडों को अपनाते हुए संपन्न कर लिया गया और वर्तमान में रबी फसलों की बुवाई करीब 90 प्रतिशत तक पूर्ण है।
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जैविक उत्पादों में कृषकों द्वारा उत्पादित सरप्लस उत्पाद के विपणन के लिए स्थान व बाजार उपलब्ध न होने के कारण सामान्य रासायनिक उत्पाद से अधिक मूल्य नहीं मिल पा रहा है। जिससे कृषकों में अपेक्षित आय में वृद्धि नहीं हो पा रही है। बताया गया कि जनपद में चार एफपीओ का गठन कर चरणबद्ध कार्य किया जा रहा है। साथ ही चयनित कृषकों ने बताया कि जैविक निवेश की प्रोत्साहन धनराशि भुगतान नहीं होने के कारण किसान हतोत्साहित हैं।
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बैठक में जिलाधिकारी ने गठित एफपीओ को विभिन्न पोर्टल पर अपने व्यवसायिक कार्ययोजना को प्रचारित-प्रसारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला परियोजना समन्वयक को निर्देशित किया कि अपनी टीम के साथ मंडी सचिव, जिला उद्यान अधिकारी, वन विभाग, कृषि विभाग से समन्वय स्थापित कर कुछ पारंपरिक उत्पादों महुआ, रागी, बाजरा को अपने कार्यक्रम में सम्मिलित करें।
सभी एफपीओ अपने नाम से अपने उत्पाद को विक्रय करें लेकिन जिले का एक ब्रांड नेम होना चाहिए। जिस पर जिलाधिकारी ने ब्रांड नेम जमदग्नि जैविक उत्पाद के नाम पर सहमति व्यक्त किया। जिस पर यूपीडास्प जैविक प्रमाणीकरण का लोगो होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों के विक्रय/प्रचार प्रसार के लिए वन विभाग से संपर्क कर प्रचार प्रसार केंद्र जिला परियोजना समन्वयक को निर्देशित किया।

जिलाधिकारी ने शहर की मंडी में जैविक उत्पादों के बिक्री के लिए एक स्थान सुरक्षित करने के लिए मंडी सचिव को निर्देशित किया। जैविक खेती से जुड़े कृषकों के भुगतान हेतु उनके भू-भाग एवं निवेश से संबंधित प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए राजस्व विभाग एवं विकास खंड अधिकारियों के माध्यम से कराने हेतु जिला परियोजना समन्वयक को निर्देशित किया।
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