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सीएमओ बोले-दान देकर आप लोग ही बनवा दें चहारदीवारी
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जंगीपुर क्षेत्र के अरसदपुर स्थित नये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का टोटा है। स्वास्थ्य केंद्र में न आवास है न शौचालय। न ही केंद्र में आज तक चहारदीवारी का ही निर्माण हो सका है। गेट पर नाली का पानी लगा रहता है। ऐसे में मरीजों को मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। यहीं नहीं एक संविदा चिकित्सक के भरोसे यह अस्पताल लंबे समय से संचालित हो रहा है। वहीं समस्या के बारे में पूछे जाने पर सीएमओ डॉ. हरगोविंद सिंह जैसे जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि आप लोग दान देकर चहारदीवारी का निर्माण करा दें। मेरे पास धन नहीं है। जिले के किसी पीएचसी में चहारदीवारी नहीं है।-
एक तरफ जहां प्रदेश सरकार शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने के साथ वहां आने वाले मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठा रही है। वहीं दूसरी ओर विभाग उस पर पानी फेरने में लगा है। इसी लापरवाही का परिणाम है कि जिले के सभी सीएचसी, पीएचसी, न्यू पीएचसी और स्वास्थ्य उपकेंद्रों स्थिति काफी खराब है। ऐसे में अरसदपुर स्थित न्यू पीएचसी का एक संविदा चिकित्सक के भरोसे संचालन हो रहा है। जबकि एक चिकित्सक का पद लंबे समय से खाली चल रहा है।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि तैनात चिकित्सक के न रहने की स्थिति में वहां उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को बैरंग घर लौटना पड़ता है। यहां प्रतिदिन पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 40 से 50 है। मुख्य गेट के पास नाली होने से परिसर में गंदा पानी काफी दिनों तक जमा रहता है। भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूटे हुए हैं। चहारदीवारी न होने से जानवरों का झुंड पूरे दिन परिसर में रहता है।
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और तो और बरसात में भवन की छत से पानी टपकता है। इससे दवा और अस्पताल में रखा सामान अक्सर खराब हो जाता है। दो बेड के इस अस्पताल में एक फार्मासिस्ट, एक लैब असिस्टेंट, एक क्षय रोग विशेषज्ञ है। आवास नहीं होने के कारण रात में अस्पताल में कोई भी स्वास्थ्य कर्मी नहीं रहता है, जिससे रात में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिलता है। यहां तैनात स्वास्थ्यकर्मी समस्या के बारे में जिला मुख्यालय को कई बार अवगत करा चुके हैं, लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी समस्या निस्तारण की जगह गैर जिम्मेदाराना बयान देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
चहारदीवारी का निर्माण होगा, इसका इस्टीमेट तैयार करने का निर्देश दिया जाएगा। व्यवस्थाएं भी दुरुस्त होगी। सीएमओ को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए, यह गलत है।- एमपी सिंह, डीएम गाजीपुर।
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एक तरफ जहां प्रदेश सरकार शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने के साथ वहां आने वाले मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठा रही है। वहीं दूसरी ओर विभाग उस पर पानी फेरने में लगा है। इसी लापरवाही का परिणाम है कि जिले के सभी सीएचसी, पीएचसी, न्यू पीएचसी और स्वास्थ्य उपकेंद्रों स्थिति काफी खराब है। ऐसे में अरसदपुर स्थित न्यू पीएचसी का एक संविदा चिकित्सक के भरोसे संचालन हो रहा है। जबकि एक चिकित्सक का पद लंबे समय से खाली चल रहा है।
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सबसे बड़ी बात तो यह है कि तैनात चिकित्सक के न रहने की स्थिति में वहां उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को बैरंग घर लौटना पड़ता है। यहां प्रतिदिन पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 40 से 50 है। मुख्य गेट के पास नाली होने से परिसर में गंदा पानी काफी दिनों तक जमा रहता है। भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूटे हुए हैं। चहारदीवारी न होने से जानवरों का झुंड पूरे दिन परिसर में रहता है।
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और तो और बरसात में भवन की छत से पानी टपकता है। इससे दवा और अस्पताल में रखा सामान अक्सर खराब हो जाता है। दो बेड के इस अस्पताल में एक फार्मासिस्ट, एक लैब असिस्टेंट, एक क्षय रोग विशेषज्ञ है। आवास नहीं होने के कारण रात में अस्पताल में कोई भी स्वास्थ्य कर्मी नहीं रहता है, जिससे रात में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिलता है। यहां तैनात स्वास्थ्यकर्मी समस्या के बारे में जिला मुख्यालय को कई बार अवगत करा चुके हैं, लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी समस्या निस्तारण की जगह गैर जिम्मेदाराना बयान देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
चहारदीवारी का निर्माण होगा, इसका इस्टीमेट तैयार करने का निर्देश दिया जाएगा। व्यवस्थाएं भी दुरुस्त होगी। सीएमओ को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए, यह गलत है।- एमपी सिंह, डीएम गाजीपुर।