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प्रधान और बीडीसी पद के लिए आई बारह आपत्तियां
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कासिमाबाद। पंचायत चुनाव में आरक्षण सूची के खिलाफ आपत्ति की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है आपत्ति करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्थानीय विकासखंड में अब तक ग्राम प्रधान पद के लिए आरक्षण को लेकर कुल नौ ग्राम पंचायतों से आपत्तियां आई हैं। दूसरी तरफ क्षेत्र पंचायत में कुल तीन आपत्तियां मिली हैं। आपत्ति करने वालों का तर्क है कि फर्जी आंकड़ों के आधार पर ग्राम पंचायतों के साथ क्षेत्र पंचायतों का भी आरक्षण किया गया है। ग्राम पंचायतों में आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होने के बाद पूरे विकासखंड की ग्राम पंचायतों में बदलाव के कारण हड़कंप मचा हुआ है। निवर्तमान ग्राम प्रधान के साथ पिछले पांच वर्षों से ग्राम पंचायतों में जनता की सेवा कर तैयारी करने वाले भावी उम्मीदवारों को उस समय झटका लगा जब आरक्षण की अनंतिम सूची जारी हुई और उसमें उनके ग्राम पंचायत का आरक्षण उनके मुताबिक नहीं रहा। कासिमाबाद विकासखंड में कुल 99 ग्राम पंचायतों के साथ 120 क्षेत्र पंचायत सदस्यों की सीट निर्धारित है। इस विकासखंड में अब तक कुल आठ ग्राम पंचायतों में प्रधान पद तथा क्षेत्र पंचायत के लिए तीन आपत्ति दर्ज कराई गई है। ग्राम पंचायत गोपालपुर के रजनीश पांडेय ने अपनी आपत्ति में लिखा है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को मिलाकर 23 सीट पूरे विकासखंड में आरक्षित होनी चाहिए थी जबकि यहां पर 25 सीट आरक्षित कर दी गई है। जयरामपुर भगवल वर्तमान समय में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई है जिसे बदलने की मांग की गयी है। इसी प्रकार सिधागर के अमरनाथ खरवार ने आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करने की मांग की है। ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर टड़वा के शेषनाथ चौहान ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि यहां पर सर्वाधिक पिछड़ी जातियां हैं। ग्राम पंचायत नगवां के अशोक कुमार सिंह ने इस ग्राम पंचायत को सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित करने की मांग किया है। उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत जानूपुर, सम्मनपुर एवं शक्करपुर सामान्य श्रेणी में रखा गया है। जबकि इन तीनों ग्राम पंचायतों में एक भी सामान्य जाति के लोग निवास नहीं करते हैं। ग्राम पंचायत जयरामपुर भगवल के दयाशंकर राय की आपत्ति है कि आरक्षण क्रम को आरोही क्रम में नहीं किया गया है। इसी प्रकार जीयनपुर के अरविंद कुमार की भी आपत्ति है। ग्राम पंचायत बठना के अशोक पाल की आपत्ति है कि ग्राम पंचायतों के गठन से लेकर अब तक लगातार सामान्य एवं अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही है। जबकि इस बार इस सीट को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए था। इसी प्रकार क्षेत्र पंचायत गंगौली प्रथम एवं द्वितीय के साथ सिपाह प्रथम के लिए आपत्ति दर्ज कराई गई है। गंगौली की दोनों सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई है। जबकि सर्वाधिक पिछड़ी जातियां हैं और पिछड़ी जाति के लिए बदलने की मांग की गई है। क्षेत्र पंचायत सिपाह में कुल 99 प्रतिशत पिछड़ी जातियां हैं जबकि इस बार इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। आपत्ति करने वालों का आरोप है कि फर्जी आंकड़े तैयार कर ग्राम पंचायतों के साथ क्षेत्र पंचायतों का आरक्षण किया गया है। इन लोगों ने 2011 की जनगणना की सूची सार्वजनिक रूप से चस्पा कर उसी आधार पर नए सिरे से आरक्षण लागू करने की मांग किया है।
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