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ठाकुर अनुकूल चंद का 127वां जन्मोत्सव मनाया
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sun, 01 Mar 2015 11:32 PM IST
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सत्संग अधिवेशन केंद्र की ओर से रविवार को रौजा क्षेत्र स्थित श्रीराम मैरेज हाल में युग पुरुषोत्तम श्रीश्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी का 127वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
वेद मांगलिक के साथ शुरू हुआ धार्मिक कार्यक्रम प्रार्थना, सत्संग और भंडारे के साथ समाप्त हुआ। इस कार्यक्रम में दूर-दराज से आए भक्तों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
इस मौके पर देवघर (झारखंड) से आए प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि श्रीश्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी ने विश्व के सभी धर्मों को एक नया रूप तथा आयाम देकर संपूर्ण मानव जाति को एक सूत्र में पिरोया है। कहा कि सतनाम मनन करो और सत्संग का आश्रय ग्रहण करो।
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ऐसा करने से उन्नति के लिए कुछ और नहीं सोचना होगा। गुरुमुखी होने की चेष्टा कीजिए। कहा कि संसार में रहते हुए मनुष्य सही धार्मिक जीवन-यापन करते हुए अध्यात्मिकता के चरम में पहुंचकर अमृत का रसास्वादन कर सकता है। कहा कि प्रकृति समाधान वही है, जो सभी समस्याओं का निदान प्रदान करता है और जीवन की प्रत्येक दिशा को परिपूर्ण करता है। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे। भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्यामनारायण सिंह, श्रीनिवास, शिव सहित अन्य लोगों का सराहनीय सहयोग रहा।
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वेद मांगलिक के साथ शुरू हुआ धार्मिक कार्यक्रम प्रार्थना, सत्संग और भंडारे के साथ समाप्त हुआ। इस कार्यक्रम में दूर-दराज से आए भक्तों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
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इस मौके पर देवघर (झारखंड) से आए प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि श्रीश्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी ने विश्व के सभी धर्मों को एक नया रूप तथा आयाम देकर संपूर्ण मानव जाति को एक सूत्र में पिरोया है। कहा कि सतनाम मनन करो और सत्संग का आश्रय ग्रहण करो।
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ऐसा करने से उन्नति के लिए कुछ और नहीं सोचना होगा। गुरुमुखी होने की चेष्टा कीजिए। कहा कि संसार में रहते हुए मनुष्य सही धार्मिक जीवन-यापन करते हुए अध्यात्मिकता के चरम में पहुंचकर अमृत का रसास्वादन कर सकता है। कहा कि प्रकृति समाधान वही है, जो सभी समस्याओं का निदान प्रदान करता है और जीवन की प्रत्येक दिशा को परिपूर्ण करता है। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे। भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्यामनारायण सिंह, श्रीनिवास, शिव सहित अन्य लोगों का सराहनीय सहयोग रहा।