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Ghazipur News: भरण-पोषण के लिए 4000 रुपये और कमरा मांगने पर 82 साल के पिता को 4 बेटों और एक बहू ने पीटा

Mon, 21 Sep 2026 12:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2026 12:36 AM IST
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An 82-year-old father was beaten by four sons and a daughter-in-law for demanding Rs 4,000 for maintenance and a room.
कोर्ट ने दिया है खर्च और कमरा देने का आदेश, एसपी के निर्देश पर पीड़ित की तहरीर पर चार पुत्रों और एक बहू पर प्राथमिकी दर्ज
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संवाद न्यूज एजेंसी
जमानिया (गाजीपुर)। करमहरी गांव निवासी लालकिशुन (82) को कोर्ट के आदेश के बाद भरण-पोषण और रहने के लिए कमरा मांगना भारी पड़ गया। आरोप है कि कोर्ट में चल रहे मुकदमे से नाराज चारों बेटों और एक बहू ने बुजुर्ग पिता के साथ गाली-गलौज व मारपीट की और मुकदमा वापस न लेने पर जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस ने शनिवार को पीड़ित बुजुर्ग की तहरीर पर चार बेटों और बहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र सिंह ने बताया कि लालकिशुन ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर अपना दर्द बयां किया। बताया कि वह काफी वृद्ध व असहाय हैं। उनकी आमदनी का कोई जरिया नहीं है। करीब तीन वर्ष पहले उनके बेटे हरिशंकर, बहू पार्वती और पौत्र अनूप ने उनके लाखों रुपये हड़प लिया और उनके साथ मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद बुजुर्ग पिता अपने अन्य तीन बेटों रमाशंकर, उमाशंकर और गौरीशंकर के पास पहुंचे, लेकिन उन्होंने भी पिता को पनाह देने से इन्कार करते हुए भगा दिया। वह किसी तरह अपनी बेटियों के सहारे और गांव में दूसरों के चौखट पर मांग-खाकर गुजर-बसर करने को विवश हैं।
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कोर्ट ने दिया था 4000 रुपये और 2 कमरे देने का आदेश
प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ित बुजुर्ग ने तहरीर में बताया अपनों से दुत्कारे जाने के बाद लालकिशुन ने न्याय पाने के लिए परिवार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। बुजुर्ग ने अपने चारों बेटों के खिलाफ भरण-पोषण का मुकदमा दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने करीब एक साल पहले अंतरिम राहत के रूप में बेटों को आदेश दिया था कि वे पिता को 4 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण भत्ता दें और घर में रहने के लिए दो कमरे मुहैया कराएं। आरोप है कि कोर्ट का यह आदेश आने के बाद से ही चारों बेटे अपने बुजुर्ग पिता को लगातार धमकाने और मारपीट करने लगे।
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कोर्ट में पैरवी तेज हुई तो बेटों ने कर दिया हमला
आदेश का पालन न होने और लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर बुजुर्ग लालकिशुन ने अदालत में दोबारा गुहार लगाई। कोर्ट में तारीख नजदीक पड़ने और कानूनी प्रक्रिया तेज होने से बेटे भड़क गए। 13 सितंबर की शाम करीब 5 बजे चारों बेटे रमाशंकर, उमाशंकर, हरिशंकर, गौरीशंकर और बहू पार्वती एक साथ पहुंचे और बुजुर्ग पिता पर हमला बोल दिया। आरोपियों ने वृद्ध पिता को धक्का-मुक्की कर जमीन पर गिरा दिया और पीटा। इस दौरान उन्होंने धमकी दी कि अपना मुकदमा वापस ले लो, नहीं तो जान से मार देंगे। मुकदमा खत्म हो जाएगा, तब देखते हैं कौन सी कोर्ट तुझे पैसा और कमरा दिलाती है।
एसपी के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर
घटना के बाद सहमे बुजुर्ग पिता ने पहले स्थानीय कोतवाली में शिकायत की, लेकिन सुनवाई न होने पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई। कोतवाल योगेंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर उसके चारों बेटों रमाशंकर, उमाशंकर, हरिशंकर, गौरीशंकर और बहू पार्वती देवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया गया है। इसकी जांच की जा रही है।


बहू बोली- आरोप बेबुनियाद

82 वर्षीय लालकिशुन का आरोप है कि मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाते हुए उनके साथ मारपीट की गई। आरोपी बहू पार्वती देवी ने मुकदमा वापस लेने के लिए मारपीट करने के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि उन्हें और उनके बेटों को झूठे मुकदमों में फंसाकर परेशान किया जा रहा है। पार्वती देवी का कहना है कि विवाद 10 वर्ष पहले सास इंद्रासनी देवी की मृत्यु के बाद शुरू हुआ। ससुर और परिवार के अन्य सदस्य पहले से अलग रहते थे। उनका आरोप है कि पैसे और जमीन के विवाद को लेकर उनके ससुर ने उनके परिवार पर झूठे मुकदमे कराए हैं। उनका दावा है कि पुलिस प्रशासन की टीम उनके घर पर 45 बार आ चुकी है और गाजीपुर से लेकर प्रयागराज तक की अदालतों में मामले चल रहे हैं। वह और उनका परिवार कानूनी प्रक्रिया से परेशान हैं। उन्होंने अपने पास किसी अवैध संपत्ति या धनराशि होने के आरोप से भी इन्कार किया। पार्वती देवी ने कहा कि उनके ससुर को अंत्योदय कार्ड के तहत 35 किलो राशन और वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल रहा है। उनका कहना है कि इसके बावजूद उन पर और उनके परिवार पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक, लालकिशुन के तीन बेटे रमाशंकर, उमाशंकर, हरिशंकर खेती बारी करते हैं। जबकि गौरीशंकर कपड़ा का दुकान करते हैं।
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