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Ghazipur News: कोचिंग सेंटर में बेहतर शिक्षा ही नहीं, सुरक्षित वातावरण भी जरूरी
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देवचंदपुर के एडूरेन ग्लोबल स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन के संवाद कार्यक्रम में बोलतीं अभिभावक।
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गाजीपुर। एडुरेन ग्लोबल स्कूल, देवचंदपुर में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में कोचिंग संस्थाएं : हमारे बच्चों के लिए कितनी सुरक्षित हैं? विषय पर व्यापक चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों में हुई घटनाओं ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कहा कि कई कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी सहित अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है।
ऐसे में केवल बेहतर शिक्षा ही नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना भी जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि अभिभावकों को किसी भी कोचिंग संस्थान में बच्चों का प्रवेश कराने से पहले वहां की सुरक्षा व्यवस्था, भवन की स्थिति, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और आसपास के माहौल का स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा शिक्षा से पहले प्राथमिकता होनी चाहिए।
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संवाद में यह भी विचार सामने आया कि स्कूल और कोचिंग संस्थानों की भूमिका अलग-अलग है। वक्ताओं ने कहा कि स्कूल बच्चों को शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और सामाजिक वातावरण भी प्रदान करते हैं, जबकि अधिकांश कोचिंग संस्थान केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा तक सीमित रहते हैं।
ऐसे में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालयी शिक्षा की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का संचालन डॉ.शरद वर्मा ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में संगीता पांडेय मौजूद रहीं।
इस अवसर पर प्रबंधक विशाल पांडेय, ब्रजबाला यादव, शालू यादव, रीतू श्रीवास्तव, प्रियंका पांडेय, सलोनी सिंह, रिया पांडेय, स्नेहा पांडेय, आंचल गुप्ता, रेखा, मनोरमा, शिप्रा बरनवाल, माया, कृति यादव, फलक नाज सहित बड़ी संख्या में अभिभावक और प्रतिभागी अादि उपस्थित रहे।
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वक्ताओं ने कहा कि हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों में हुई घटनाओं ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कहा कि कई कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी सहित अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है।
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ऐसे में केवल बेहतर शिक्षा ही नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना भी जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि अभिभावकों को किसी भी कोचिंग संस्थान में बच्चों का प्रवेश कराने से पहले वहां की सुरक्षा व्यवस्था, भवन की स्थिति, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और आसपास के माहौल का स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा शिक्षा से पहले प्राथमिकता होनी चाहिए।
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संवाद में यह भी विचार सामने आया कि स्कूल और कोचिंग संस्थानों की भूमिका अलग-अलग है। वक्ताओं ने कहा कि स्कूल बच्चों को शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और सामाजिक वातावरण भी प्रदान करते हैं, जबकि अधिकांश कोचिंग संस्थान केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा तक सीमित रहते हैं।
ऐसे में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालयी शिक्षा की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का संचालन डॉ.शरद वर्मा ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में संगीता पांडेय मौजूद रहीं।
इस अवसर पर प्रबंधक विशाल पांडेय, ब्रजबाला यादव, शालू यादव, रीतू श्रीवास्तव, प्रियंका पांडेय, सलोनी सिंह, रिया पांडेय, स्नेहा पांडेय, आंचल गुप्ता, रेखा, मनोरमा, शिप्रा बरनवाल, माया, कृति यादव, फलक नाज सहित बड़ी संख्या में अभिभावक और प्रतिभागी अादि उपस्थित रहे।