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तीन वर्ष तक मान्यता देने के नाम पर होता रहा खेल
Ghazipur
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। जिले में कक्षा एक से लेकर आठ तक की मान्यता के नाम पर बड़े पैमाने पर खेल हुआ है। वर्ष 2004 से लेकर 07 के बीच मान्यता उन विद्यालयों को भी बांट दी गई, जिनके विद्यालय कागज में संचालित हो रहे थे। इन विद्यालयों के नाम से अभी भी छात्रवृत्ति की रकम उतारी जा रही है। इसकी शिकायत कुछ लोगों ने जिलाधिकारी से की है।
वर्ष 2004 से 07 के बीच यहां पर बेसिक शिक्षा अधिकारी के रूप में राकेश सिंह तैनात किए गए थे। इस दौरान फर्जी तरीके से खूब मान्यता प्रदान की गई। मान्यता के मानक को भी पूरा नहीं किया गया। देखा जाए तो जिले में लगभग डेढ़ हजार से अधिक विद्यालयों को मान्यता दी गई है। इसमें कई सौ ऐसे विद्यालय हैं जो अभी भी मौके पर नहीं हैं। इन विद्यालयों के छात्रों के नाम से फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति भी आहरित की जा रही है। इस साल भी हर ब्लाक में दस हजार से पांच हजार ऐसे छात्र पाए गए हैं जिनके विद्यालय का कोई पता नहीं है। यह भी जानकारी नहीं हो पा रही है कि विद्यालय को मान्यता प्राप्त है या नहीं। पूरे जिले में ऐसे छात्रों की संख्या एक लाख के करीब बताई जा रही है।
जिस समय राकेश सिंह बीएसए थे उस समय मान्यता रेवड़ियों की तरह बांटी गई थी। जबकि नियम है कि मान्यता उन्हीं विद्यालयों को दी जाएगी जिनके पास पर्याप्त भवन है। इस संबंध में बीएसए नंदलाल सिंह ने बताया कि जब से पूरे प्रदेश में आरटीई का नियम लागू हुआ है तब से मान्यता लेना कठिन कार्य हो गया है। उन्हीं विद्यालयों को मान्यता दी जाएगी जो आरटीई के नियम का पालन करते होंगे। प्राथमिक विद्यालयों को मान्यता देने के नाम पर सख्ती बरती जा रही है।
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वर्ष 2004 से 07 के बीच यहां पर बेसिक शिक्षा अधिकारी के रूप में राकेश सिंह तैनात किए गए थे। इस दौरान फर्जी तरीके से खूब मान्यता प्रदान की गई। मान्यता के मानक को भी पूरा नहीं किया गया। देखा जाए तो जिले में लगभग डेढ़ हजार से अधिक विद्यालयों को मान्यता दी गई है। इसमें कई सौ ऐसे विद्यालय हैं जो अभी भी मौके पर नहीं हैं। इन विद्यालयों के छात्रों के नाम से फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति भी आहरित की जा रही है। इस साल भी हर ब्लाक में दस हजार से पांच हजार ऐसे छात्र पाए गए हैं जिनके विद्यालय का कोई पता नहीं है। यह भी जानकारी नहीं हो पा रही है कि विद्यालय को मान्यता प्राप्त है या नहीं। पूरे जिले में ऐसे छात्रों की संख्या एक लाख के करीब बताई जा रही है।
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जिस समय राकेश सिंह बीएसए थे उस समय मान्यता रेवड़ियों की तरह बांटी गई थी। जबकि नियम है कि मान्यता उन्हीं विद्यालयों को दी जाएगी जिनके पास पर्याप्त भवन है। इस संबंध में बीएसए नंदलाल सिंह ने बताया कि जब से पूरे प्रदेश में आरटीई का नियम लागू हुआ है तब से मान्यता लेना कठिन कार्य हो गया है। उन्हीं विद्यालयों को मान्यता दी जाएगी जो आरटीई के नियम का पालन करते होंगे। प्राथमिक विद्यालयों को मान्यता देने के नाम पर सख्ती बरती जा रही है।
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