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लापरवाह मनरेगा कर्मियों पर शिकंजा
Ghazipur
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। मनरेगा योजना में लापरवाही करने वाले संविदा कर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। ऐसे मनरेगा कर्मियों की सूची तैयार की जा रही है जो लंबे समय से योजना में गड़बड़ी कर रहे थे और लगातार अनुपस्थित चल रहे थे। इन कर्मियों पर कार्रवाई का निर्देश सीडीओ ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने दिया है।
भारी भरकम बजट वाली मनरेगा योजना में तेजी लाने के लिए शासन के निर्देश पर संविदाकर्मियों की तैनाती की गई है। इन्हें अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। ब्लाक स्तर पर तीन पद सृजित किए गए हैं। पहला पद एपीओ का है। इस पद पर कार्य करने वाले कर्मी की जिम्मेदारी है कि वह ब्लाक क्षेत्र से जुड़े मनरेगा के कार्यों पर नजर रखें। यदि योजना में गड़बड़ी की जा रही है तो इसकी रिपोर्ट बीडीओ के माध्यम से सीडीओ कार्यालय को प्रेषित करें। लेकिन अधिकांश एपीओ अपने ब्लाक में समय से नहीं पहुंचते हैं। कई तो अक्सर अनुपस्थित रहते हैं। यदि ब्लाक पर जाते हैं तो मनरेगा से जुड़ी परियोजनाओं की गुणवत्ता की रिपोर्ट में हीलाहवाली करते हैं। इसकी शिकायत कई बार अधिकारियों के पास पहुंच चुकी है। इसमें कई एपीओ को चेतावनी भी जारी की जा चुकी है। इसी तरह प्रत्येक ब्लाक पर कोआर्डिनेटर का पद बना हुआ है जिनका काम सोशल आडिट करने का है। यदि योजना में गड़बड़ हो रही है तो इसकी परियोजना वार रिपोर्ट देनी होती है। इसमें भी मनमानी की जा रही है। इसके बाद नंबर आता है ब्लाक टीए का। इस कर्मचारी की जिम्मेदारी परियोजनाओं की एमबी बनाने की होती है। इन कर्मियों की मिलीभगत से मनरेगा योजना में गड़बड़ी चरम पर है। इन कर्मियों के कार्यों की क्रास चेकिंग करने के लिए सीडीओ किसी भी ब्लाक में धमक सकते हैं। इसकी जानकारी देते हुए सीडीओ ने बताया कि मनरेगा कर्मियों की लगातार शिकायतें मिल रही है। यदि चेतावनी के बाद भी सुधार नहीं हुआ तो इनकी सेवा समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
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भारी भरकम बजट वाली मनरेगा योजना में तेजी लाने के लिए शासन के निर्देश पर संविदाकर्मियों की तैनाती की गई है। इन्हें अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। ब्लाक स्तर पर तीन पद सृजित किए गए हैं। पहला पद एपीओ का है। इस पद पर कार्य करने वाले कर्मी की जिम्मेदारी है कि वह ब्लाक क्षेत्र से जुड़े मनरेगा के कार्यों पर नजर रखें। यदि योजना में गड़बड़ी की जा रही है तो इसकी रिपोर्ट बीडीओ के माध्यम से सीडीओ कार्यालय को प्रेषित करें। लेकिन अधिकांश एपीओ अपने ब्लाक में समय से नहीं पहुंचते हैं। कई तो अक्सर अनुपस्थित रहते हैं। यदि ब्लाक पर जाते हैं तो मनरेगा से जुड़ी परियोजनाओं की गुणवत्ता की रिपोर्ट में हीलाहवाली करते हैं। इसकी शिकायत कई बार अधिकारियों के पास पहुंच चुकी है। इसमें कई एपीओ को चेतावनी भी जारी की जा चुकी है। इसी तरह प्रत्येक ब्लाक पर कोआर्डिनेटर का पद बना हुआ है जिनका काम सोशल आडिट करने का है। यदि योजना में गड़बड़ हो रही है तो इसकी परियोजना वार रिपोर्ट देनी होती है। इसमें भी मनमानी की जा रही है। इसके बाद नंबर आता है ब्लाक टीए का। इस कर्मचारी की जिम्मेदारी परियोजनाओं की एमबी बनाने की होती है। इन कर्मियों की मिलीभगत से मनरेगा योजना में गड़बड़ी चरम पर है। इन कर्मियों के कार्यों की क्रास चेकिंग करने के लिए सीडीओ किसी भी ब्लाक में धमक सकते हैं। इसकी जानकारी देते हुए सीडीओ ने बताया कि मनरेगा कर्मियों की लगातार शिकायतें मिल रही है। यदि चेतावनी के बाद भी सुधार नहीं हुआ तो इनकी सेवा समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
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