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नान ईयर इश्यू करेंसी होगी बंद
Ghazipur
Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में नान ईयर इश्यू करेंसी यानी जिन नोटों पर वर्ष अंकित नहीं है, उसे चलन सेे बंद करने का फरमान जारी कर दिया है। आरबीआई को आशंका है कि पुराने नोटों की तकनीकी तक पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई पहुंच गई है। लिहाजा इन नोटों के स्थान पर चौड़ी पट्टी वाले नोटों को चलन में रखा जाएगा। पुरानी नोटों को बाजार से हटाने के लिए पिछले दिनों आरबीआई ने सभी बैंकों की करेंसी चेस्ट शाखाओें में आदेश जारी किया है। इसमें साफ कहा गया है कि जिन नोटों पर जारी करने का वर्ष अंकित नहीं रहेगा और जिनकी चांदी की पट्टियां पतली होंगी उन नोटों को बाजार से आउट किया जाए।
भारतीय रिजर्व बैंक पांच, दस, 20, 50, 100, 500 और 1000 के नोट जारी करता है। इनमें 500 और एक हजार की करेंसी के अक्सर नकली होने की संभावना रहती है। कोई भी हो अपने आप से पूरी तरह से तस्कीद करने के बाद ही इन नोटों को अपनाता है। स्थानीय यूबीआई की करेंसी चेस्ट प्रभारी विनोद प्रसाद शर्मा की मानें तो पूरे देश में जारी करेंसी का 10 प्रतिशत हिस्सा जाली करेंसी से भरा हुआ है। इनमें सबसे अधिक पांच सौ और एक हजार की नोट नकली होते हैं। इन नोटों की खेप देश में पहुंचाने में पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होना बताया जा रहा है। देखा जाए तो हर शहर में रोजाना बड़े पैमाने पर जाली नोट पकड़े जाते हैं। अभी पिछले महीने दिलदारनगर पुलिस ने बड़े पैमाने पर जाली नोटों को पहुंचाने वाले रैके ट को पकड़ा था। यही नहीं बैंक भी जाली नोटों को अक्सर पकड़ते हैं।
आरबीआई का मानना है कि एक हजार एवं पांच सौ के पुराने नोटों को बाजार में रहने से जाली नोटों की पहचान करने में लोगों को परेशानी हो रही है। इन नोटों पर जारी करने वाला वर्ष भी अंकित नहीं रहता है। देखा जाए तो इन नोटों के बीच में दिखने वाली चांदी की पट्टियां भी पतली रहती हैं। जबकि नए नोटों की पट्टियां दिखने में चौड़ी लगती हैं। इन नोटों में जाली होने की संभावना काफी कम रहती है। यूबीआई की करेंसी चेस्ट प्रभारी विनोद प्रसाद शर्मा ने बताया कि आरबीआई द्वारा जारी किए आदेश पर अमल शुरू कर दिया गया है।
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भारतीय रिजर्व बैंक पांच, दस, 20, 50, 100, 500 और 1000 के नोट जारी करता है। इनमें 500 और एक हजार की करेंसी के अक्सर नकली होने की संभावना रहती है। कोई भी हो अपने आप से पूरी तरह से तस्कीद करने के बाद ही इन नोटों को अपनाता है। स्थानीय यूबीआई की करेंसी चेस्ट प्रभारी विनोद प्रसाद शर्मा की मानें तो पूरे देश में जारी करेंसी का 10 प्रतिशत हिस्सा जाली करेंसी से भरा हुआ है। इनमें सबसे अधिक पांच सौ और एक हजार की नोट नकली होते हैं। इन नोटों की खेप देश में पहुंचाने में पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होना बताया जा रहा है। देखा जाए तो हर शहर में रोजाना बड़े पैमाने पर जाली नोट पकड़े जाते हैं। अभी पिछले महीने दिलदारनगर पुलिस ने बड़े पैमाने पर जाली नोटों को पहुंचाने वाले रैके ट को पकड़ा था। यही नहीं बैंक भी जाली नोटों को अक्सर पकड़ते हैं।
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आरबीआई का मानना है कि एक हजार एवं पांच सौ के पुराने नोटों को बाजार में रहने से जाली नोटों की पहचान करने में लोगों को परेशानी हो रही है। इन नोटों पर जारी करने वाला वर्ष भी अंकित नहीं रहता है। देखा जाए तो इन नोटों के बीच में दिखने वाली चांदी की पट्टियां भी पतली रहती हैं। जबकि नए नोटों की पट्टियां दिखने में चौड़ी लगती हैं। इन नोटों में जाली होने की संभावना काफी कम रहती है। यूबीआई की करेंसी चेस्ट प्रभारी विनोद प्रसाद शर्मा ने बताया कि आरबीआई द्वारा जारी किए आदेश पर अमल शुरू कर दिया गया है।
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