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गुलजार होने लगे ताड़ी के बगीचे
Ghazipur
Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। ताड़ी का सीजन शुरु होते ही शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के बागीचे इसके शौकीनों से गुलजार होने लगे हैं। आलम यह है कि इसके शौकीनों का सुबह बागीचे में पहुंचने का जो सिलसिला शुरु होता है, वह देर शम तक जारी रहता है। कोई नशे के लिए इसका सेवन कर रहा है तो कोई फायदे के लिए।
इस समय तड़कुलारिष्ट की बहार आई हुई है। इसके शौकीनों का आलम यह है कि वह अल सुबह ही बाग में पहुंच जा रहे हैं। इसके बाद उनके द्वारा जम कर ताड़ी का सेवन किया जा रहा है। यही स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों के बागों की भी है। शहर के गोड़ा देदाती, फुल्लनपुर, पत्थरघाट, गोराबाजार, रौजा, पक्कापुल आदि स्थानों पर ताड़ी की स्थायी तथा अस्थायी दुकानें सज रही हैं। इन दुकानों पर सुबह से ही ताड़ी के शौकीनों के पहुंचने का क्रम शुरु हो जा रहा है, जो देर शाम तक जारी रहता है। कुछ लोग सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाने वाली ताड़ी का सेवन भोर में कर रहे हैं, वहीं अधिकांश नशे के लिए इसका सेवन पूरे दिन कर रहे हैं। ताड़ी पेट के लिए काफी फायदेमंद मानी गई है, बशर्ते की वह सुबह की हो। शाम को उतरने वाली ताड़ी धूप के कारण काफी गर्म हो जाती है, जो काफी नशा करती है। बहुत से लोग फायदे के लिए छोटे-छोटे बच्चों को भी ताड़ी का सेवन कराते हैं इसका सीजन आने से शराब के लती लोगों की चांदी कट रही है। शराब से काफी कम पैसे में मिलने वाली ताड़ी का उनके द्वारा छक कर सेवन किया जा रहा है। इस दौरान नशा सिर पर चढ़ने पर बागानों में नशेड़ियों में आपस में बहस होने के साथ ही मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। पेड़ से ताड़ी उतारने के लिए हर वर्ष बिहार से गछुए आते हैं, जो पूरे सीजन भर यही रह कर ताड़ी उतारने का काम करते हैं। सीजन समाप्त होने के बाद वह कमाए हुए पैसों को लेकर पुन: बिहार अपने घर लौट जाते हैं। कुल मिला कर इस समय ताड़ी के शीकीनों के सिर इसका सुरूर चढ़ कर बोल रहा है।
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इस समय तड़कुलारिष्ट की बहार आई हुई है। इसके शौकीनों का आलम यह है कि वह अल सुबह ही बाग में पहुंच जा रहे हैं। इसके बाद उनके द्वारा जम कर ताड़ी का सेवन किया जा रहा है। यही स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों के बागों की भी है। शहर के गोड़ा देदाती, फुल्लनपुर, पत्थरघाट, गोराबाजार, रौजा, पक्कापुल आदि स्थानों पर ताड़ी की स्थायी तथा अस्थायी दुकानें सज रही हैं। इन दुकानों पर सुबह से ही ताड़ी के शौकीनों के पहुंचने का क्रम शुरु हो जा रहा है, जो देर शाम तक जारी रहता है। कुछ लोग सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाने वाली ताड़ी का सेवन भोर में कर रहे हैं, वहीं अधिकांश नशे के लिए इसका सेवन पूरे दिन कर रहे हैं। ताड़ी पेट के लिए काफी फायदेमंद मानी गई है, बशर्ते की वह सुबह की हो। शाम को उतरने वाली ताड़ी धूप के कारण काफी गर्म हो जाती है, जो काफी नशा करती है। बहुत से लोग फायदे के लिए छोटे-छोटे बच्चों को भी ताड़ी का सेवन कराते हैं इसका सीजन आने से शराब के लती लोगों की चांदी कट रही है। शराब से काफी कम पैसे में मिलने वाली ताड़ी का उनके द्वारा छक कर सेवन किया जा रहा है। इस दौरान नशा सिर पर चढ़ने पर बागानों में नशेड़ियों में आपस में बहस होने के साथ ही मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। पेड़ से ताड़ी उतारने के लिए हर वर्ष बिहार से गछुए आते हैं, जो पूरे सीजन भर यही रह कर ताड़ी उतारने का काम करते हैं। सीजन समाप्त होने के बाद वह कमाए हुए पैसों को लेकर पुन: बिहार अपने घर लौट जाते हैं। कुल मिला कर इस समय ताड़ी के शीकीनों के सिर इसका सुरूर चढ़ कर बोल रहा है।
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