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सरकारी चावल को लेकर बढ़ी रार
Ghazipur
Updated Fri, 23 May 2014 05:31 AM IST
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गाजीपुर। प्रदेश में 650 करोड़ मूल्य के सरकारी चावल की रिकवरी मिलों से करा पाने में विफल रही अखिलेश सरकार के खिलाफ विपणन शाखा से जुड़े डिप्टी आरएमओ से लेकर क्षेत्रीय विपणन निरीक्षकों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे दी है। आयुक्त खाद्य से वार्ता विफल होने के बाद एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष धनंजय सिंह ने एक जून से हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। संगठन के हड़ताल पर जाने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर भी प्रभाव पड़ेगा। इसको लेकर अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है।
यूपी फूड एंड सिविल सप्लाईज इंस्पेक्टर आफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं गाजीपुर के डिप्टी आरएमओ धनंजय सिंह ने बीते बुधवार को आयुक्त खाद्य से मिलकर प्रदेश में बकाया सरकारी चावल को जमा करने के संबंध में वार्ता की। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्ष से करीब 650 करोड़ रुपये मूल्य का सरकारी चावल जमा करने में मिलर आनाकानी कर रहे हैं जबकि विपणन विभाग के अधिकारियों ने लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसको लेकर शासन का रूख स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि दो वर्ष पहले सरकारी चावल को लेकर हम लोग हड़ताल पर चले गए थे। फिर भी प्रदेश सरकार ने अभी तक मिलरों के विरुद्ध सख्त रुख नहीं अपना पाई। सिर्फ अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन इसको किसी भी सूरत में सहन नहीं कर पाएगा। उन्होंने बताया कि 8 करोड़ एमटी सरकारी चावल मिलरों के पास डंप है। इस चावल का बाजार मूल्य करीब 650 करोड़ रुपये है। इसको लेकर सरकार ने अपना रूख अभी तक स्पष्ट नहीं किया। कई जिलों में मिलरों के विरुद्ध मुकदमा भी कायम कराया गया है, लेकिन पुलिस दबाव में आकर अभी तक एक भी मिलर को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। यदि प्रदेश सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया तो एक जून से सभी विपणन शाखा के साथ-साथ अन्य खाद्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे। इस हड़ताल के बाद प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरी तरह से ठप हो जाएगी। साथ ही गेहूं खरीद भी प्रभावित होगी।
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यूपी फूड एंड सिविल सप्लाईज इंस्पेक्टर आफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं गाजीपुर के डिप्टी आरएमओ धनंजय सिंह ने बीते बुधवार को आयुक्त खाद्य से मिलकर प्रदेश में बकाया सरकारी चावल को जमा करने के संबंध में वार्ता की। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्ष से करीब 650 करोड़ रुपये मूल्य का सरकारी चावल जमा करने में मिलर आनाकानी कर रहे हैं जबकि विपणन विभाग के अधिकारियों ने लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसको लेकर शासन का रूख स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि दो वर्ष पहले सरकारी चावल को लेकर हम लोग हड़ताल पर चले गए थे। फिर भी प्रदेश सरकार ने अभी तक मिलरों के विरुद्ध सख्त रुख नहीं अपना पाई। सिर्फ अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन इसको किसी भी सूरत में सहन नहीं कर पाएगा। उन्होंने बताया कि 8 करोड़ एमटी सरकारी चावल मिलरों के पास डंप है। इस चावल का बाजार मूल्य करीब 650 करोड़ रुपये है। इसको लेकर सरकार ने अपना रूख अभी तक स्पष्ट नहीं किया। कई जिलों में मिलरों के विरुद्ध मुकदमा भी कायम कराया गया है, लेकिन पुलिस दबाव में आकर अभी तक एक भी मिलर को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। यदि प्रदेश सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया तो एक जून से सभी विपणन शाखा के साथ-साथ अन्य खाद्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे। इस हड़ताल के बाद प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरी तरह से ठप हो जाएगी। साथ ही गेहूं खरीद भी प्रभावित होगी।
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