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संवेदनहीनता से छिना बच्चों के सिर से बाप का साया
Ghazipur
Updated Thu, 19 Dec 2013 05:44 AM IST
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जमानिया। गामा बिंद के परिवार में शायद मातम का माहौल नहीं होता अगर रेल कर्मियों ने थोड़ी सी संवेदना दिखाई होती। बुधवार की दोपहर पत्नी और बच्चों को ट्रेन में बैठाकर चलती ट्रेन से उतरने के दौरान गिरकर गंभीर रूप से घायल गामा ने समय से इलाज न मिलने की वजह से तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
हेतिमपुर निवासी गामा बिंद (34 वर्ष) की पत्नी को मायके जाना था। गामा साइकिल से पत्नी सावित्री बेटी काजल (3) और पुत्र हरिओम (5) को लेकर रेलवे स्टेशन पर आया। दोपहर एक बजे उसने सभी को मुगलसराय-पटना ईएमयू ट्रेन में बैठाया। इसके बाद वह ट्रेन से उतर गया। इसी बीच उसे याद आया कि उसने खर्चे के लिए पत्नी को पैसे नहीं दिए हैं। अपने परिवार को पैसा देने के लिए वह दोबारा ट्रेन में सवार हो गया। इसी बीच ट्रेन खुल गई। हड़बड़ाहट में ट्रेन से उतरने के दौरान वह गिरकर ट्रेन के नीचे आ गया, जिससे उसका बांया पैर कट गया। गंभीर रूप से घायल होकर छटपटा रहे गामा को दो सफाई कर्मियों ने ट्रैक से हटाया और इसके बाद वे खुद गायब हो गए। इसके बाद किसी भी रेलकर्मी ने घायल की तरफ नजर तक दौड़ाना मुनासिब नहीं समझा। उसकी गंभीर हालत देखकर आखिरकार यात्रियों ने 108 नंबर की एम्बुलेंस को सूचना देने के साथ ही गामा के घरवालों को जानकारी दी। उधर पति को गिरता देख पत्नी सावित्री भी ट्रेन से उतरने लगी, जिसे यात्रियों ने रोक लिया। वह छह किलोमीटर आगे अगले स्टेशन पर उतरकर अपने बच्चों संग वापस जमानिया स्टेशन पर पहुंची। लेकिन तबतक इलाज के अभाव में तड़फड़ाते हुए गामा ने करीब एक घंटे बाद दम तोड़ दिया। पति की मौत से पत्नी धाडे़ें मारकर चीख-पुकार करने लगी। पिता की मौत से अंजान मासूम बच्चे भी मां के आंसू देखकर बिलखने लगे। मृतक के परिवार के लोग भी स्टेशन पर पहुंच गए। यात्रियों में इस बात को लेकर रोष था कि अगर समय से गामा को उपचार की सुविधा मिल गई होती तो उसकी जान नहीं जाती। यात्री स्टेशन प्रबंधन को कोस रहे थे।
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हेतिमपुर निवासी गामा बिंद (34 वर्ष) की पत्नी को मायके जाना था। गामा साइकिल से पत्नी सावित्री बेटी काजल (3) और पुत्र हरिओम (5) को लेकर रेलवे स्टेशन पर आया। दोपहर एक बजे उसने सभी को मुगलसराय-पटना ईएमयू ट्रेन में बैठाया। इसके बाद वह ट्रेन से उतर गया। इसी बीच उसे याद आया कि उसने खर्चे के लिए पत्नी को पैसे नहीं दिए हैं। अपने परिवार को पैसा देने के लिए वह दोबारा ट्रेन में सवार हो गया। इसी बीच ट्रेन खुल गई। हड़बड़ाहट में ट्रेन से उतरने के दौरान वह गिरकर ट्रेन के नीचे आ गया, जिससे उसका बांया पैर कट गया। गंभीर रूप से घायल होकर छटपटा रहे गामा को दो सफाई कर्मियों ने ट्रैक से हटाया और इसके बाद वे खुद गायब हो गए। इसके बाद किसी भी रेलकर्मी ने घायल की तरफ नजर तक दौड़ाना मुनासिब नहीं समझा। उसकी गंभीर हालत देखकर आखिरकार यात्रियों ने 108 नंबर की एम्बुलेंस को सूचना देने के साथ ही गामा के घरवालों को जानकारी दी। उधर पति को गिरता देख पत्नी सावित्री भी ट्रेन से उतरने लगी, जिसे यात्रियों ने रोक लिया। वह छह किलोमीटर आगे अगले स्टेशन पर उतरकर अपने बच्चों संग वापस जमानिया स्टेशन पर पहुंची। लेकिन तबतक इलाज के अभाव में तड़फड़ाते हुए गामा ने करीब एक घंटे बाद दम तोड़ दिया। पति की मौत से पत्नी धाडे़ें मारकर चीख-पुकार करने लगी। पिता की मौत से अंजान मासूम बच्चे भी मां के आंसू देखकर बिलखने लगे। मृतक के परिवार के लोग भी स्टेशन पर पहुंच गए। यात्रियों में इस बात को लेकर रोष था कि अगर समय से गामा को उपचार की सुविधा मिल गई होती तो उसकी जान नहीं जाती। यात्री स्टेशन प्रबंधन को कोस रहे थे।
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