{"_id":"59-103848","slug":"Ghazipur-103848-59","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा ने कुछ छोड़ा नहीं, प्रशासन ने कुछ दिया नहीं ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा ने कुछ छोड़ा नहीं, प्रशासन ने कुछ दिया नहीं
Ghazipur
Updated Tue, 30 Jul 2013 05:33 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुहम्मदाबाद। गंगा की कटान के चलते शिविरों में रह रहे पीड़ितों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। परिवार और मवेशियों के साथ बदहाली में दिन काट रहे लोगों को राहत के नाम पर कुछ खास नहीं मिल रहा है। सभी पीड़ितों के चेहरे पर मायूसी, आंखों में आंसू के साथ ही प्रशासन के प्रति जबर्दस्त गुस्सा है। हालत यह है कि बारिश से उनके सामान भीग रहे हैं, तो उमस और गंदगी से बच्चे बीमार हो रहे हैं। चारे के अभाव में भूखे मवेशियों की हालत भी पस्त होने लगी है।
शिवराय का पुरा एवं सेमरा के कटान पीड़ितों प्राथमिक पाठशाला सेमरा-प्रथम, प्राथमिक विद्यालय- द्वितीय, जूनियर हाईस्कूल, जच्चा-बच्चा केन्द्र एवं टिनशेड डाल कर बनाए गए शिविरों में अपने मवेशियों एवं परिवार संग आश्रय लिए हुए हैं। प्रशासन की ओर से सुविधा देने के नाम पर खास कुछ भी नहीं किया गया है। शिविरों के पास अलग से मड़ई एवं प्लास्टिक डालकर छोटे-छोटे स्थान में मवेशियों एवं सामान के साथ सपरिवार रह रहे लोग मायूस हैं। सबसे दयनीय स्थिति टिनशेड डाल कर बनाए गए शिविरों में रह रहे दलित बस्ती के लोगों की है। सैकड़ों लोग एक छोटे से टिनशेड में रह रहे हैं। ऐसे में अक्सर इनका सामना विषैले जीव जंतुओं से भी हो रहा है। लोगों में एक ही आस है कि सरकार जमीन दे दे तो वह अपने छप्पर आदि डाल कर गुजर बसर करें।
विज्ञापन
शिवराय का पुरा एवं सेमरा के कटान पीड़ितों प्राथमिक पाठशाला सेमरा-प्रथम, प्राथमिक विद्यालय- द्वितीय, जूनियर हाईस्कूल, जच्चा-बच्चा केन्द्र एवं टिनशेड डाल कर बनाए गए शिविरों में अपने मवेशियों एवं परिवार संग आश्रय लिए हुए हैं। प्रशासन की ओर से सुविधा देने के नाम पर खास कुछ भी नहीं किया गया है। शिविरों के पास अलग से मड़ई एवं प्लास्टिक डालकर छोटे-छोटे स्थान में मवेशियों एवं सामान के साथ सपरिवार रह रहे लोग मायूस हैं। सबसे दयनीय स्थिति टिनशेड डाल कर बनाए गए शिविरों में रह रहे दलित बस्ती के लोगों की है। सैकड़ों लोग एक छोटे से टिनशेड में रह रहे हैं। ऐसे में अक्सर इनका सामना विषैले जीव जंतुओं से भी हो रहा है। लोगों में एक ही आस है कि सरकार जमीन दे दे तो वह अपने छप्पर आदि डाल कर गुजर बसर करें।
विज्ञापन