गाजीपुर। मानव शरीर को चुस्त और दुरुस्त रखने के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व की बेहद आवश्यकता है। जागरूकता को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में जिले के सभी ब्लॉकों के दो-दो फार्मासिस्ट की एक कार्यशाला ‘न्यूट्रीशन इंटरनेशनल’ की ओर से आयोजित की गई। न्यूट्रिशन इंटरनेशनल के मंडलीय सलाहकार पंकज श्रीवास्तव ने प्रशिक्षण के दौरान सभी फार्मासिस्ट को आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, विटामिन ए, जिंक, एल्बेंडाजोल के लाभ के बारे में बताया। साथ ही इन सबको किस उम्र के बच्चे को कितनी मात्रा में देना चाहिए इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी। बताया कि पोषक तत्वों के प्रबंधन के लिए विटामिन ‘ए’ की खुराक नौ माह से 12 माह तक के बच्चों को आधा चम्मच खसरा एवं रुबेला टीका के साथ देना चाहिए। दूसरी खुराक 16 से 24 माह के बच्चों को एक चम्मच देना चाहिए जबकि तीसरी खुराक दो वर्ष से पांच वर्ष तक के बच्चों को रुबेला खसरा के डोज के बाद हर छह माह के अंतराल पर एक चम्मच देना चाहिए। उन्होंने बताया कि छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चे को आईएफएस सिरप देना चाहिए। यह सिरप सप्ताह में दो बार देना चाहिए। जबकि पांच से 10 वर्ष के बच्चे को आईएफए की पिंक गोली जिसमें आयरन और फोलिक एसिड होता है, सप्ताह में एक बार भोजन के एक घंटे के बाद देनी चाहिए। 10 वर्ष से 19 वर्ष के किशोर और किशोरियों को आईएफए की नीली गोली सप्ताह में एक बार देनी चाहिए। साथ ही गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आईएफए की लाल गोली प्रतिदिन 180 दिनों तक पहली तिमाही के बाद से तथा प्रसव के बाद छह माह तक दी जानी चाहिए। बताया कि एनीमिया मुक्त भारत की नई गाइडलाइन के तहत 10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरियों एवं गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को दी जाने वाली आईएफए की नीली एवं लाल गोली जिसमें एलिमेंटल आयरन एवं फोलिक एसिड शामिल होता है। साथ ही जिन बच्चों में कृमि संक्रमण होता है उन्हें हर छह माह पर एल्बेंडाजोल की एक खुराक देना चाहिए। कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीसी मौर्य ने की। इस अवसर पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आर के सिन्हा और परिवार नियोजन के नोडल अधिकारी डॉ. केके वर्मा उपस्थित थे।