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जिला अस्पताल में भोजन के नाम पर खेल
Updated Wed, 23 May 2018 11:08 PM IST
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गाजीपुर। जिला अस्पताल में मरीजों के भोजन, दूध और फल में भारी खेल चल रहा है। गुरबत में जीने वाले मरीज भोजन के लिए मोहताज रहते हैं, मासूम बच्चे से लेकर वृद्ध तक दूध की मांग करते हैं, लेकिन किसी को नहीं मिलता। बावजूद जिला अस्पताल के रजिस्टर में सब कुछ दर्ज किया जाता है। बुुधवार को जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों से बातचीत में यह सचाई सामने आई। मरीजों ने एक स्वर में कहा कि हमें भोजन, दूध और फल कभी नहीं मिला, जबकि परिसर में मौजूद लोगों ने बताया कि कभी-कभार आला अफसरों के निरीक्षण के दौरान मरीजों को भोजन, दूध और फल मुहैया कराया जाता है।
स्वास्थ्य महकमे की रिपोर्ट पर एक नजर डालें तो पिछले तीन महीने में कुल 4642 मरीजों को भोजन दिया गया है। इस पर कुल एक लाख 20 हजार 774 रुपये खर्च हुुए हैं। विभाग के पास अप्रैल तथा मई महीने का कोई लेेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। विभागीय अफसर और लिपिक मरीजों को दिए गए दूध और फल के बारे में भी बताने से कतरा रहे हैँ। सीएमएस कार्यालय से मिले आंकड़ों को सही मानें तो इस साल के जनवरी माह में 1813 मरीजों को भोजन दिया गया। इन पर कुल 43268 रुपये खर्च किए गए। इसी क्रम में फरवरी माह में 1604 मरीजों को भोजन मिला। जिनपर 48447 रुपये खर्च किए गए, जबकि मार्च माह में 1225 मरीजों को भोजन मिला, जिनपर कुल 29259 रुपये खर्च किए गए। जिला अस्पताल के मरीजों तथा उनके तीमारदारों से इस संबंध में बात करने पर लोगों ने बताया कि जिला अस्पताल में फल और दूध खाने की बात कौन कहे, कभी देखने तक को नहीं मिला। यहां किसी भी मरीज को भोजन नहीं दिया जाता। लोग खुद अपनी-अपनी व्यवस्था करते हैँ। यहां तक की लावारिस मरीज की जान भी किसी समाजसेवी की दृष्टि पड़ने पर ही बचती है।
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स्वास्थ्य महकमे की रिपोर्ट पर एक नजर डालें तो पिछले तीन महीने में कुल 4642 मरीजों को भोजन दिया गया है। इस पर कुल एक लाख 20 हजार 774 रुपये खर्च हुुए हैं। विभाग के पास अप्रैल तथा मई महीने का कोई लेेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। विभागीय अफसर और लिपिक मरीजों को दिए गए दूध और फल के बारे में भी बताने से कतरा रहे हैँ। सीएमएस कार्यालय से मिले आंकड़ों को सही मानें तो इस साल के जनवरी माह में 1813 मरीजों को भोजन दिया गया। इन पर कुल 43268 रुपये खर्च किए गए। इसी क्रम में फरवरी माह में 1604 मरीजों को भोजन मिला। जिनपर 48447 रुपये खर्च किए गए, जबकि मार्च माह में 1225 मरीजों को भोजन मिला, जिनपर कुल 29259 रुपये खर्च किए गए। जिला अस्पताल के मरीजों तथा उनके तीमारदारों से इस संबंध में बात करने पर लोगों ने बताया कि जिला अस्पताल में फल और दूध खाने की बात कौन कहे, कभी देखने तक को नहीं मिला। यहां किसी भी मरीज को भोजन नहीं दिया जाता। लोग खुद अपनी-अपनी व्यवस्था करते हैँ। यहां तक की लावारिस मरीज की जान भी किसी समाजसेवी की दृष्टि पड़ने पर ही बचती है।
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