गाजीपुर। भारत-पाक, भारत-चीन या फिर कारगिल का युद्ध हो। जब-जब देश पर दुश्मनों ने आंख उठाई है, यहां के रणबांकुरों ने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए जिले का नाम रोशन किया है। 17 सितंबर 1965 में भारत-पाक युद्ध में दुल्लहपुर क्षेत्र के धामूपुर निवासी वीर अब्दुल हमीद पाकिस्तान के तीन टैंकों को ध्वस्त करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे। उन्हें परमवीर चक्र का सम्मान मिला था। एमावंशी निवासी शहीद रामउग्रह पांडेय की बहादुरी पर उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। कारगिल युद्ध में जिले के भैरोपुर बद्धोपुर गांव निवासी कमलेश सिंह, बाघी बलेसड़ी निवासी शेषनाथ सिंह यादव, धनईपुर निवासी संजय कुमार यादव, पखनपुरा निवासी मोहम्मद इश्तियाक खां, पड़ैनिया निवासी रामदुलार यादव, पंडितपुरा निवासी जयप्रकाश यादव, लहना निवासी अश्विनी कुमार, मुस्तफा चक निवासी रामविलास सिंह यादव, धुनका गांव निवासी दिनेश कुमार शहीद हो गए थे। जिले के जवानों की शहादत का दौर इतने पर भी नहीं थमा। इसके बाद भी देश की रक्षा में तैनात जिले के जवान अपने प्राणों को न्यौछावर करते रहे। डेढ़गांवा निवासी कर्नल एमएन राय भी बहादुरी का परिचय देते हुए शहीद हुए थे। 18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के निकट सेना के बेस कैंप पर हुए हमले में जिले के मरदह के देउपुर निवासी हरेंद्र यादव (28) वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के रजौली सेक्टर में आतंकी हमले में करंडा गांव के सोकनी निवासी कमलेश यादव (31) शहीद हो गए थे। शहादत का क्रम यही नहीं रुका। पाकिस्तान के नियंत्रण रेखा के पास हुई गोलाबारी में बिरनो निवासी मनोज कुमार कुशवाहा और कासिमाबाद के नसीरुद्दीनपुरा गांव निवासी शशांक कुमार सिंह (25) वीरगति को प्राप्त हो गए थे।