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कटान रोकने के उपाय से संतुष्ट नहीं दिखे पीड़ित
Updated Mon, 06 Aug 2018 11:48 PM IST
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गाजीपुर। रफीपुर और बड़हरिया में कटान रोकने के लिए बांस का कैरेट और झाड़ियों को लगाने का कार्य चल रहा है। कटान पीड़ित इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। उनका कहना है कि कटान रोकने का प्रयास तो किया जा रहा है, लेकिन इस उपाय से कटान रुकने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। यदि गंगा के जलस्तर से वृद्धि हुई को यह उपाय गंगा की तेज धारा में बह जाएगा।
बीते दिनों गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होने के साथ ही बड़हरिया, रफीपुर और पूजनबाबा के आश्रम पर कटान का क्रम भी तेज हो गया था। इस दौरान तीन दिनों में दर्जनों किसानों की लगभग दस बीघा भूमि कट कर गंगा में समाहित हो गई थी। कटान की रफ्तार से बड़हरिया के उन पीड़ितों की दिल की धड़कने बढ़ गई थीं, जिनके मकान कटान के मुहाने पर थे। वह इससे परेशान थे कि उनके मकान कटान की भेंट चढ़ जाएंगे। पीड़ितों ने डीएम से मुलाकात किया था। इस पर जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को आदेशित किया था। पिछले कई दिनों से विभाग की तरफ से रफीपुर और बड़हरिया में कटान वाले स्थान पर बांस का कैरेट लगा कर उसने बोरी में भरकर ईंट-पत्थर डालने के साथ ही पेड़ों की डालियों और झांड़-झंखाड़ डालने का काम किया जा रहा है। पीड़ितों ने कहा कि यह ईश्वर की कृपा है कि पिछले तीन-चार दिनों से कटान की गति धीमी है, अन्यथा अब तक कई घर भी भूमि के साथ कट कर गंगा में समाहित हो गए होते। कह्रा कि हम लोग कटान रोकने के उपाय के कार्य से संतुष्ट नहीं हैं। कटान रोकने के लिए यह व्यवस्था नाकाफी है। पिछले वर्ष भी कटान रोकने के लिए ईंट डाल कर बल्लियां लगाई गई थीं, जो पानी के बहाव में बह गई थी। नदी विज्ञानी डा. राकेश सिंह ने बताया कि बांस के कैरेट की जगह वायर कैरेट में बोल्डर डालकर अगर कार्य कराया जाय तो कटान रुकने की 80 प्रतिशत उम्मीद है। पानी के तेज बहाव में बांस के कैरेट क्षतिग्रस्त होने पर कटान का खतरा पहले से भी अधिक हो सकता है।
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बीते दिनों गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होने के साथ ही बड़हरिया, रफीपुर और पूजनबाबा के आश्रम पर कटान का क्रम भी तेज हो गया था। इस दौरान तीन दिनों में दर्जनों किसानों की लगभग दस बीघा भूमि कट कर गंगा में समाहित हो गई थी। कटान की रफ्तार से बड़हरिया के उन पीड़ितों की दिल की धड़कने बढ़ गई थीं, जिनके मकान कटान के मुहाने पर थे। वह इससे परेशान थे कि उनके मकान कटान की भेंट चढ़ जाएंगे। पीड़ितों ने डीएम से मुलाकात किया था। इस पर जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को आदेशित किया था। पिछले कई दिनों से विभाग की तरफ से रफीपुर और बड़हरिया में कटान वाले स्थान पर बांस का कैरेट लगा कर उसने बोरी में भरकर ईंट-पत्थर डालने के साथ ही पेड़ों की डालियों और झांड़-झंखाड़ डालने का काम किया जा रहा है। पीड़ितों ने कहा कि यह ईश्वर की कृपा है कि पिछले तीन-चार दिनों से कटान की गति धीमी है, अन्यथा अब तक कई घर भी भूमि के साथ कट कर गंगा में समाहित हो गए होते। कह्रा कि हम लोग कटान रोकने के उपाय के कार्य से संतुष्ट नहीं हैं। कटान रोकने के लिए यह व्यवस्था नाकाफी है। पिछले वर्ष भी कटान रोकने के लिए ईंट डाल कर बल्लियां लगाई गई थीं, जो पानी के बहाव में बह गई थी। नदी विज्ञानी डा. राकेश सिंह ने बताया कि बांस के कैरेट की जगह वायर कैरेट में बोल्डर डालकर अगर कार्य कराया जाय तो कटान रुकने की 80 प्रतिशत उम्मीद है। पानी के तेज बहाव में बांस के कैरेट क्षतिग्रस्त होने पर कटान का खतरा पहले से भी अधिक हो सकता है।
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