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जिस घर में बुजुर्ग सुखी हैं वहीं है समृद्धि
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गाजीपुर। अखिल भारतीय कायस्थ चित्रगुप्त महासभा की ओर से रविवार को मिश्र बाजार स्थित एक मैरेज हाल में स्वजातीय बुजुर्गों का सम्मान अपनी पहचान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जिस घर में बुजुर्ग सुखी हैं उसी घर में समृद्धि आती है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डा. नवनीत श्रीवास्तव ने चित्रगुप्त महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित तथा दीप प्रज्ज्वलन कर किया। छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर समा बांधा। इसके बाद बुजुर्गों को शाल तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने कहा कि बदलते परिवेश में बुजुर्ग अपने ही परिवार में अपना अस्तित्व तलाश रहे हैं जो बहुत ही दुखद है। हम सभी को तथा आगे आने वाले पीढ़ी को भी सचेत होना चाहिए। अगर सभी लोग अपना संस्कार न भूले तो कभी भी किसी भी बुजुर्ग को वृद्धाश्रम जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। विशिष्ट अतिथि रविंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि जिस मां बाप ने अपना खून पसीना एक करके औलाद को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया हो अगर वह ठोकर खाने को मजबूर हो तो उस औलाद का जीवन व्यर्थ है। हम आज जिस तरह से पश्चिमी संस्कृति की नकल कर रहे हैं। उसमें अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। बुजुर्गों की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। हमें हमेशा उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। एकल परिवार की परंपरा से परहेज करना चाहिए। अन्य वक्ताओं ने कहा कि आज के परिवेश में हम भी अपने बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा दिला तो रहे हैं लेकिन उसमें घुल मिलकर अपनी संस्कृति और संस्कार से दूर कर दे रहे हैं। इस मौके पर दीनानाथ श्रीवास्तव, लालजी लाल, अजय श्रीवास्तव, शिवकुमार, अशोक श्रीवास्तव, सरिता श्रीवास्तव, रेखा श्रीवास्तव, शानू, बालेश्वर, प्रवीण श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। संचालन राजेंदु अस्थाना ने किया।
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