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सरल होता है संतों का ह्रदय
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:19 PM IST
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जखनिया। सिद्धपीठ हथियाराम मठ में शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में सोमवार की रात कथा वाचक पातालपुरी मठ वाराणसी के महंत बालकदास एवं आचार्य अवध किशोर ने संयुक्त रूप से गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अनेक सत्कर्म करने के बाद धरा पर सद्गुरु का दर्शन करने पर मानव जीव का पदार्पण होता है।
बालकदास ने बताया कि संतों का हृदय सरल तथा कोमल होता है। पवित्र भाव से गुरुजनों के सानिध्य में जाने तथा उनके उपदेशों का अनुकरण करने पर मानव के शिखर पर जाने का मार्ग प्रशस्त होता है। रामकथा कलयुग के पापों को नष्ट कर भवसागर की नैया से पार करने का काम करता है। जिस प्राणी में परमात्मा की कृपा लग जाए उसे मिटाया नहीं जा सकता। सती परित्याग की कथा को दोहराते हुए बताया कि मर्यादा से हटकर किए गए कार्य सार्थक नहीं होते। संस्कार से हटकर बड़ों की बातों को न मानना, झूठ बोलना सब पतन के मार्ग की ओर ले जाते हैं। श्रीमद्भागवत कथा वाचक अवध किशोर ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा समस्त ज्ञान का प्रकाश है। जिनकी रचना वेदव्यास ने 12 स्तंभों में करके बताया कि यह समस्त ज्ञान का पुराण है। इसमें साकार एवं निराकार ब्रह्म का वर्णन किया गया है। अपने कर्मों के अनुसार ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मौके पर आचार्य रामानंद, सोम प्रसाद, दीपक यति, सर्वेशचंद्र पांडेय, दीनदयाल तिवारी, रमन पोखरेल, लाल बाबा, देवराहा बाबा, नितीश आदि उपस्थित थे।
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बालकदास ने बताया कि संतों का हृदय सरल तथा कोमल होता है। पवित्र भाव से गुरुजनों के सानिध्य में जाने तथा उनके उपदेशों का अनुकरण करने पर मानव के शिखर पर जाने का मार्ग प्रशस्त होता है। रामकथा कलयुग के पापों को नष्ट कर भवसागर की नैया से पार करने का काम करता है। जिस प्राणी में परमात्मा की कृपा लग जाए उसे मिटाया नहीं जा सकता। सती परित्याग की कथा को दोहराते हुए बताया कि मर्यादा से हटकर किए गए कार्य सार्थक नहीं होते। संस्कार से हटकर बड़ों की बातों को न मानना, झूठ बोलना सब पतन के मार्ग की ओर ले जाते हैं। श्रीमद्भागवत कथा वाचक अवध किशोर ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा समस्त ज्ञान का प्रकाश है। जिनकी रचना वेदव्यास ने 12 स्तंभों में करके बताया कि यह समस्त ज्ञान का पुराण है। इसमें साकार एवं निराकार ब्रह्म का वर्णन किया गया है। अपने कर्मों के अनुसार ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मौके पर आचार्य रामानंद, सोम प्रसाद, दीपक यति, सर्वेशचंद्र पांडेय, दीनदयाल तिवारी, रमन पोखरेल, लाल बाबा, देवराहा बाबा, नितीश आदि उपस्थित थे।
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