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नेटवर्क फेल होने से किसानों को नहीं मिल पा रही खाद
Updated Mon, 10 Dec 2018 10:47 PM IST
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गाजीपुर। जिले में खाद बिक्री के लिए सहकारी समितियों एवं प्राइवेट दुकानों पर पीओएस मशीन उपलब्ध कराई गई है। इस पर किसानों का अंगूठा लगाने के बाद आधार कार्ड संख्या डालकर खाद बिक्री की व्यवस्था है। बावजूद इसके ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क फेल हो जाने के चलते बहुत से केंद्रों पर किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। इससे रबी की बुआई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
भारत सरकार की ओर से खाद पर किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी की धनराशि सीधे किसानों के खाते में भेजे जाने की व्यवस्था के प्रथम चरण में प्राइवेट खाद की दुकानों एवं सहकारी समितियों पर पीओएस मशीन उपलब्ध कराई गई है। खाद विक्रेता की तरफ से मशीन को चालू कर किसान का अंगूठा लगाने के बाद आधार कार्ड संख्या डाला जाता है। मशीन जब ओके करती है तब खाद की बोरी की संख्या डाली जाती है। मशीन से एक पर्ची निकलती है जिस पर दिनांक, आधार कार्ड संख्या, खाद का नाम एवं खाद का मूल्य प्रिंट होकर निकलता है। तब खाद किसान को मिलती है लेकिन जिले के बहुत से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के चलते मशीन काम नहीं करती है। इसके चलते किसानों को उर्वरक नहीं मिल पा रही है। बहुत से बुजुर्ग किसानों का अंगूठा लगाने पर मशीन नहीं ले पाती है। इसके कारण उन्हें उर्वरक से वंचित होना पड़ता है। नेटवर्क की समस्या से रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुआई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिले में प्राइवेट खाद दुकानों के अलावा 166 सहकारी समितियों के विक्रय केंद्र पर खाद किसानों को दी जाती है। नगद पैसा देकर खाद खरीदने -में असमर्थ किसानों को सहकारी समितियों द्वारा ऋृण पर खाद दी जाती है। इस पर उन्हें ब्याज में राहत मिलती है और उन्हे समय से कर्जा वापस करने पर मात्र तीन प्रतिशत ब्याज देना पड़ता है। जिले में 148 न्याय पंचायत स्तरीय साधन सहकारी समितियों के माध्यम से लगभग एक लाख से अधिक किसान उर्वरक प्राप्त करते हैं। पीओएस मशीन के माध्यम से खाद वितरण की व्यवस्था से जहां एक तरफ किसानों को खाद लेने में परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ सहकारी समितियों का ऋृण व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। सहायक विकास अधिकारी सहकारिता जेपी त्रिपाठी ने बताया कि पीओएस मशीन से उर्वरक वितरण में नेटवर्क का ठीक रहना आवश्यक है। जहां नेटवर्क काम नहीं करता वहां खाद के वितरण पर प्रभाव पड़ता है।
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भारत सरकार की ओर से खाद पर किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी की धनराशि सीधे किसानों के खाते में भेजे जाने की व्यवस्था के प्रथम चरण में प्राइवेट खाद की दुकानों एवं सहकारी समितियों पर पीओएस मशीन उपलब्ध कराई गई है। खाद विक्रेता की तरफ से मशीन को चालू कर किसान का अंगूठा लगाने के बाद आधार कार्ड संख्या डाला जाता है। मशीन जब ओके करती है तब खाद की बोरी की संख्या डाली जाती है। मशीन से एक पर्ची निकलती है जिस पर दिनांक, आधार कार्ड संख्या, खाद का नाम एवं खाद का मूल्य प्रिंट होकर निकलता है। तब खाद किसान को मिलती है लेकिन जिले के बहुत से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के चलते मशीन काम नहीं करती है। इसके चलते किसानों को उर्वरक नहीं मिल पा रही है। बहुत से बुजुर्ग किसानों का अंगूठा लगाने पर मशीन नहीं ले पाती है। इसके कारण उन्हें उर्वरक से वंचित होना पड़ता है। नेटवर्क की समस्या से रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुआई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिले में प्राइवेट खाद दुकानों के अलावा 166 सहकारी समितियों के विक्रय केंद्र पर खाद किसानों को दी जाती है। नगद पैसा देकर खाद खरीदने -में असमर्थ किसानों को सहकारी समितियों द्वारा ऋृण पर खाद दी जाती है। इस पर उन्हें ब्याज में राहत मिलती है और उन्हे समय से कर्जा वापस करने पर मात्र तीन प्रतिशत ब्याज देना पड़ता है। जिले में 148 न्याय पंचायत स्तरीय साधन सहकारी समितियों के माध्यम से लगभग एक लाख से अधिक किसान उर्वरक प्राप्त करते हैं। पीओएस मशीन के माध्यम से खाद वितरण की व्यवस्था से जहां एक तरफ किसानों को खाद लेने में परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ सहकारी समितियों का ऋृण व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। सहायक विकास अधिकारी सहकारिता जेपी त्रिपाठी ने बताया कि पीओएस मशीन से उर्वरक वितरण में नेटवर्क का ठीक रहना आवश्यक है। जहां नेटवर्क काम नहीं करता वहां खाद के वितरण पर प्रभाव पड़ता है।
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