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होली की पूर्व संध्या पर आयोजित हुआ कवि सम्मेलन
Updated Thu, 01 Mar 2018 09:36 PM IST
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गाजीपुर।
प्रगतिशील रचनाकार मंच के तत्वावधान में होली की पूर्व संध्या पर गुरुवार को राधारमण महाविद्यालय रुहीपुर के सभागार में सरस कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गौरीशंकर पांडेय सरस के वाणी वंदना से हुआ।
सुदर्शन सिंह कुशवाहा चिराग ने गजल पेश करके माहौल को रसमय बना दिया। उन्होंने कहा कि गुलशन में कोई ऐसा शायद ही बचा होगा, जिस गुल पे नहीं हमने तेरा नाम लिखा होगा।’ दिनेश चंद्र शर्मा ने देश के सीमाओं पर तैनात सैनिकों का आह्वान किया तो श्रोता वाह-वाह कर उठे। उन्होंने कहा कि हम खुदा से दुआ कर रहे साथियों, दुश्मनों को जला दो होलिका की तरह। विजय कुमार मधुरेश ने अनेक हास्य व्यंग मुक्तक प्रस्तुत करके श्रोताओं की खूब वाहवाही लुटी। मधुुरेश ने होली के संदर्भ में गजल पेश करते हुए कहा कि अबीर गुलाल उड़ाओ तू आज होली में, सभी पे रंग बरसाओं तू आज होली में। छोड़ करके सभी आपसी नफरत प्यारे गले से गले मिलाओ तू आज होली में। मऊ से पधारे युवा कवि पंकज प्रखर ने गजल पेश किया चांद तारों के साथ रहते हैं, वो नजारों के साथ रहते हैं। उनको तूफां का खौफ कैसे हो, जो किनारों के साथ रहते हैं। इनके अलावा, शंकर निर्मय, सूरज पांडेय, बेसुध, डॉ. कालपुरुष ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इसके पूर्व, कार्यक्रम के आयोजक एवं महाविद्यालय के प्रबंधक रामवृक्ष सिंह यादव ने कवियों एवं श्रोताओं के माथे पर अबीर लगाकर होली के औचित्य पर प्रकाश डाला। संचालन मधुुरेश ने किया।
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प्रगतिशील रचनाकार मंच के तत्वावधान में होली की पूर्व संध्या पर गुरुवार को राधारमण महाविद्यालय रुहीपुर के सभागार में सरस कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गौरीशंकर पांडेय सरस के वाणी वंदना से हुआ।
सुदर्शन सिंह कुशवाहा चिराग ने गजल पेश करके माहौल को रसमय बना दिया। उन्होंने कहा कि गुलशन में कोई ऐसा शायद ही बचा होगा, जिस गुल पे नहीं हमने तेरा नाम लिखा होगा।’ दिनेश चंद्र शर्मा ने देश के सीमाओं पर तैनात सैनिकों का आह्वान किया तो श्रोता वाह-वाह कर उठे। उन्होंने कहा कि हम खुदा से दुआ कर रहे साथियों, दुश्मनों को जला दो होलिका की तरह। विजय कुमार मधुरेश ने अनेक हास्य व्यंग मुक्तक प्रस्तुत करके श्रोताओं की खूब वाहवाही लुटी। मधुुरेश ने होली के संदर्भ में गजल पेश करते हुए कहा कि अबीर गुलाल उड़ाओ तू आज होली में, सभी पे रंग बरसाओं तू आज होली में। छोड़ करके सभी आपसी नफरत प्यारे गले से गले मिलाओ तू आज होली में। मऊ से पधारे युवा कवि पंकज प्रखर ने गजल पेश किया चांद तारों के साथ रहते हैं, वो नजारों के साथ रहते हैं। उनको तूफां का खौफ कैसे हो, जो किनारों के साथ रहते हैं। इनके अलावा, शंकर निर्मय, सूरज पांडेय, बेसुध, डॉ. कालपुरुष ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इसके पूर्व, कार्यक्रम के आयोजक एवं महाविद्यालय के प्रबंधक रामवृक्ष सिंह यादव ने कवियों एवं श्रोताओं के माथे पर अबीर लगाकर होली के औचित्य पर प्रकाश डाला। संचालन मधुुरेश ने किया।
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