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हमीद सेतु बंद होने से मंडी को लाखों की चपत
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गाजीपुर। पूर्वांचल की बड़ी मंडियों में शुमार नवीन कृषि उत्पादन मंडी समिति जंगीपुर के व्यापारी इन दिनों मायूस हैं। बाजार के दिनों में गुलजार रहने वाले मंडी की रौनक गायब हो गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि शहर में आने वाले डीसीएम, ट्रक आदि बड़े वाहनों का प्रवेश करीब एक पखवारे से रोक दिया गया है। इसके चलते किसान मंडी तक अपनी उपज चावल आदि नहीं पहुंचा पा रहे हैं। जमानिया क्षेत्र को धान का कटोरा कहा जाता है। पुल बंद हो जाने से उधर का अनाज भी मंडी नहीं आ पा रहा है। इसके चलते किसानों ही नहीं व्यापारियों को भी नुकसान हो रहा है। यही नहीं मंडी को भी लाखों की चपत लग रही है।
गाजीपुर को बिहार राज्य तथा अन्य शहरों को जोड़ने वाले प्रमुख हमीद सेतु के पिलर संख्या छह और सात के बीच चौदह नंबर का रोलिंग बेयरिंग गत 31 दिसंबर को धंस गया था। इसके चलते एक बड़ी दरार पड़ गई थी। इसके बाद प्रशासन ने इस पुल पर आवागमन रोक दिया था। हाल ही में पुल तो बना दिया गया लेकिन बड़े वाहनों का आवागमन रोक दिया गया। इसके चलते बक्सर, जमानिया, दिलदारनगर, चंदौली आदि से आने वाले बड़े वाहन बाहर से ही निकल जा रहे हैं। उधर भरौली का पुल भी बड़े वाहनों के लिए बंद है जिसके चलते बिहार की ओर से आने वाले वाहन भी हमीद सेतु का ही प्रयोग करते थे। इससे मालवाहकों के आने जाने से जंगीपुर मंडी समिति का बाजार काफी बढ़ गया था। जंगीपुर संवाददाता के अनुसार हमीद सेतु पर बड़े वाहनों पर रोक का सीधा असर यहां की मंडी समिति पर पड़ रहा है। यहां पहले की तरह चहल-पहल नहीं रह गई है। हर वर्ष धान के सीजन के इस समय में दूरदराज से व्यापारी यहां आते हैं और बड़ी मात्रा में चावल, धान तथा अन्य अनाजों की खरीद बिक्री करते हैं। रविवार और गुरुवार को यहां साप्ताहिक बाजार लगता है। अब अनाज नहीं आने से व्यापारी दिन भर मायूस बैठे रहते हैं। बाजार के दिन मंडी को भी लाखों की चपत लग रही है। मंडी में जो भी खरीद बिक्री होती है उस पर 2.5 प्रतिशत मंडी शुल्क के रूप में वसूला जाता है। बाजार के दिन करीब एक लाख रुपये तक का राजस्व वसूल लिया जाता है। मंडी सचिव सियाराम राय ने बताया कि पुल बंद होने के बाद से मंडी का करीब पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ है। अगर इसी प्रकार की मंदी बनी रही तो आगे यहां की खरीद बिक्री जबरदस्त रूप से प्रभावित होगी।
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गाजीपुर को बिहार राज्य तथा अन्य शहरों को जोड़ने वाले प्रमुख हमीद सेतु के पिलर संख्या छह और सात के बीच चौदह नंबर का रोलिंग बेयरिंग गत 31 दिसंबर को धंस गया था। इसके चलते एक बड़ी दरार पड़ गई थी। इसके बाद प्रशासन ने इस पुल पर आवागमन रोक दिया था। हाल ही में पुल तो बना दिया गया लेकिन बड़े वाहनों का आवागमन रोक दिया गया। इसके चलते बक्सर, जमानिया, दिलदारनगर, चंदौली आदि से आने वाले बड़े वाहन बाहर से ही निकल जा रहे हैं। उधर भरौली का पुल भी बड़े वाहनों के लिए बंद है जिसके चलते बिहार की ओर से आने वाले वाहन भी हमीद सेतु का ही प्रयोग करते थे। इससे मालवाहकों के आने जाने से जंगीपुर मंडी समिति का बाजार काफी बढ़ गया था। जंगीपुर संवाददाता के अनुसार हमीद सेतु पर बड़े वाहनों पर रोक का सीधा असर यहां की मंडी समिति पर पड़ रहा है। यहां पहले की तरह चहल-पहल नहीं रह गई है। हर वर्ष धान के सीजन के इस समय में दूरदराज से व्यापारी यहां आते हैं और बड़ी मात्रा में चावल, धान तथा अन्य अनाजों की खरीद बिक्री करते हैं। रविवार और गुरुवार को यहां साप्ताहिक बाजार लगता है। अब अनाज नहीं आने से व्यापारी दिन भर मायूस बैठे रहते हैं। बाजार के दिन मंडी को भी लाखों की चपत लग रही है। मंडी में जो भी खरीद बिक्री होती है उस पर 2.5 प्रतिशत मंडी शुल्क के रूप में वसूला जाता है। बाजार के दिन करीब एक लाख रुपये तक का राजस्व वसूल लिया जाता है। मंडी सचिव सियाराम राय ने बताया कि पुल बंद होने के बाद से मंडी का करीब पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ है। अगर इसी प्रकार की मंदी बनी रही तो आगे यहां की खरीद बिक्री जबरदस्त रूप से प्रभावित होगी।
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