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35 साल पुराने बिजली तार उठाए हैं शहर का भार

Fri, 10 Jun 2022 11:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jun 2022 11:33 PM IST
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35 years old power lines have lifted the burden of the city
गाजीपुर। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर तार से विद्युत व्यवस्था चरमराई हुई है। अपनी क्षमता खो चुके ये तार गर्मी के दिनों में ओवलोड और तेज हवा के चलते टूट जाते हैं। जिसकी चपेट में आने से कई घटनाएं भी हो चुकी हैं। जान, माल का नुकसान होने के साथ आए दिन घंटों बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोग परेशान हो जाते हैं। स्थिति यह है कि शहर के 80 फीसदी तार जर्जर हो चुके हैं। यहां लगे विद्युत तार 30 से 35 साल पुराने हैं। जिससे काफी कमजोर होने से लोड सहन करने में सक्षम नहीं है। जिससे पिछले दो महीने में रौजा-लोटन इमली, जमानिया मोड़ और प्रकाश नगर में हाइटेंशन के तार टूटने की घटनाएं हुई। जिससे शहर भर में छह से दस घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहा।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली व्यवस्था का यही हाल है। यहां भी तार जर्जर होने से घंटों बिजली आपूर्ति बाधित होने के साथ घटनाएं हो चुकी है। 8 जून को मुहम्मदाबाद के अलावलपुर में एक 37 वर्षीय महिला की बिजली तार की चपेट में आ गई। जिसमें उसकी मौत हो गई।
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मरदह संवाददाता के अनुसार, मरदह, भोजापुर, पृथ्वीपुर विद्युत सब स्टेशन से बिजली आपूर्ति की स्थिति यह है कि आए दिन जर्जर तार टूटने से 150 गांव के लोगों का जीना मुहाल है। मरदह बस स्टैंड से बाजार होकर छोटका मरदह गांव तक 80 फीसदी तार जर्जर हो चुके हैं। जिससे तार जानलेवा साबित हो रहे, लेकिन कोई सुध नहीं ले रहा। कासिमाबाद संवाददाता के अनुसार, क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में बिजली के तार जर्जर है। जिससे तार टूटने की घटनाएं आम हैं। कासिमाबाद तहसील क्षेत्र और क्षेत्र के सबसे बड़े गांव गंगौली में भी बिजली तार की स्थिति बेहद खराब है।
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2021-22 में पांच घटनाएं दर्ज, मिला मुआवजा
2021-22 में बिजली की चपेट में मौत के सिर्फ पांच मामले बिजली विभाग के पास दर्ज हुए। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी मामलों का निबटारा हो गया। साथ ही पीड़ित परिवार को विभाग की ओर से मुआवजा उपलब्ध कराया गया।
पांच लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान
बिजली विभाग की लापरवाही से मौत पर पीड़ित परिवार के वारिश को पांच लाख रुपये देने का प्रवाधान है। इसके लिए घटना का पोस्टमार्टम होना जरूरी है। विद्युत सुरक्षा निदेशायल की ओर से जांच रिपोर्ट तैयार किया जाता है। जिसमें घटना का ब्यौरा होने के साथ वारिश का विवरण दर्ज किया जाता है। विभाग की ओर से कार्रवाई पूरी होने के बाद वारिश को पांच लाख रुपये का मुआवजा उपलब्ध कराया जाता है।
जर्जर लोहे के पोल के वेल्डिंग करने को लेकर नहीं होता टेंडर
बिजली विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि लोहे के जर्जर पोलों के मरम्मत करने के लिए विभाग के पास कोई व्यवस्था नहीं है। शहर के कई इलाकों में लोहे के पोल काफी जर्जर हो चुके हैं। इसके लिए कोई टेंडर भी नहीं होता। ऐसे में वेल्डिंग का काम समय से नहीं हो पाता। वहीं, विभाग में तार, इंसुलेटर, क्लैंप आदि की कमी होने से मरम्मत के कार्य में देरी होने के साथ परेशानी होती है।

शहरी क्षेत्र में बिजली के तार बदलने के लिए रिवांप योजना के तहत करीब 600 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव की मंजूरी के बाद धनराशि के बाद शहर में तार बदलने का काम किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में एलटी तार लगाने का काम चल रहा है। जल्द ही टीमें बढ़ाकर काम तेज किया जाएगा।
सीबी सिंह, अधिशाषी अभियंता बिजली विभाग
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