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नहरों में पानी नहीं और नलकूप भी खराब, कैसे हो सिंचाई
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गाजीपुर। जिले में व्यापक पैमाने पर की जाने वाली आलू, गेहूं तथा अन्य फसलों में पानी देने का महत्वपूर्ण समय चल रहा है लेकिन हालत यह है कि ज्यादातर नहरें तथा माइनर सूखे पड़े हैं। जमानिया क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल, दिलदारनगर की मुख्य नहर, देवकली पंप कैनाल, शारदा सहायक नहर, दलपतपुर राजवाहा, रामदासपुर राजवाहा आदि सभी में पानी का अभाव बना हुआ है। इन नहरों से जिले के सैकड़ों गांवों की खेतों की सिंचाई होती है। अधिकतर नलकूप भी खराब हैं। किसान पानी के लिए परेशान हो कर दर-दर भटक रहे हैं। निजी संसाधनों से खेत की सिंचाई करना उन्हें मंहगा पड़ रहा है।
जिले के मुहम्मदाबाद, कासिमाबाद, सदर, जमानिया तथा सेवराई आदि तहसील क्षेत्रों में आलू, गेहूं के साथ रबी की प्रमुख फसलों की व्यापक पैमाने पर खेती की जाती है। करीब एक-डेढ़ माह में सभी फसलें तैयार हो जाएंगी। इन दिनों इनकी सिंचाई किया जाना नितांत आवश्यक है। इसके बाद आलू और गेहूं के पौधों में अनाज के विकास का क्रम तेज हो जाता है। ऐसे समय में भी जिले की कई नहरों में पानी नहीं है। किसानों के आंदोलनों के बाद भी कोई खास असर नहीं दिखा। दुबिहा संवाददाता के अनुसार इस क्षेत्र में दलपतपुर तथा रामदासपुर दो राजवाहे हैं। इनसे जहूराबाद, बांकी, असावर, दलपतपुर, नेवादा, खड़हरा, रामदासपुर ,दुबिहा, गोबिंदपुर, पाहुपुर, लालपिपरी आदि तीन दर्जन गांवों की सैकड़ों एकड़ फसलों की सिंचाई होती थी। इधर कई वर्ष से पानी नहीं आने से किसान महंगे निजी साधनों का प्रयोग करते हैं। जमानिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल की स्थापना तो की गई लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिला। इसके साथ ही पंप कैनाल से देवैथा रजवाहा 14.60 किमी, दिलदारनगर रजवाहा 24 किमी, ताड़ीघाट रजवाहा 27 किमी, नौली रजवाहा 14 किमी है। पंप कैनाल में कुल 92 टेल हैं, जहां तक पानी पहुंचाया जाता है। इनसे करीब 27 हजार हेक्टेयर सिंचाई होती है। इस क्षेत्र में गेहूं की अधिक खेती होती है लेकिन सूखी नहरें देख कर किसानों के माथे पर चिंता व्याप्त है। इसी प्रकार गहमर क्षेत्र की पश्चिमी तथा पूर्वी दो लघु डाल नहरें भी बेपानी हैं। दिलदारनगर संवाददाता ने बताया कि क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल से निकली मुख्य नहर जमानिया, दिलदारनगर, भदौरा, गहमर होते हुए बारा के कर्मनाशा नदी तक जाती है। यह किसानों का दुर्भाग्य है कि यह क्षेत्र नहरों से पटे होने के बावजूद उनमें पानी नहीं है।
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जिले के मुहम्मदाबाद, कासिमाबाद, सदर, जमानिया तथा सेवराई आदि तहसील क्षेत्रों में आलू, गेहूं के साथ रबी की प्रमुख फसलों की व्यापक पैमाने पर खेती की जाती है। करीब एक-डेढ़ माह में सभी फसलें तैयार हो जाएंगी। इन दिनों इनकी सिंचाई किया जाना नितांत आवश्यक है। इसके बाद आलू और गेहूं के पौधों में अनाज के विकास का क्रम तेज हो जाता है। ऐसे समय में भी जिले की कई नहरों में पानी नहीं है। किसानों के आंदोलनों के बाद भी कोई खास असर नहीं दिखा। दुबिहा संवाददाता के अनुसार इस क्षेत्र में दलपतपुर तथा रामदासपुर दो राजवाहे हैं। इनसे जहूराबाद, बांकी, असावर, दलपतपुर, नेवादा, खड़हरा, रामदासपुर ,दुबिहा, गोबिंदपुर, पाहुपुर, लालपिपरी आदि तीन दर्जन गांवों की सैकड़ों एकड़ फसलों की सिंचाई होती थी। इधर कई वर्ष से पानी नहीं आने से किसान महंगे निजी साधनों का प्रयोग करते हैं। जमानिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल की स्थापना तो की गई लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिला। इसके साथ ही पंप कैनाल से देवैथा रजवाहा 14.60 किमी, दिलदारनगर रजवाहा 24 किमी, ताड़ीघाट रजवाहा 27 किमी, नौली रजवाहा 14 किमी है। पंप कैनाल में कुल 92 टेल हैं, जहां तक पानी पहुंचाया जाता है। इनसे करीब 27 हजार हेक्टेयर सिंचाई होती है। इस क्षेत्र में गेहूं की अधिक खेती होती है लेकिन सूखी नहरें देख कर किसानों के माथे पर चिंता व्याप्त है। इसी प्रकार गहमर क्षेत्र की पश्चिमी तथा पूर्वी दो लघु डाल नहरें भी बेपानी हैं। दिलदारनगर संवाददाता ने बताया कि क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल से निकली मुख्य नहर जमानिया, दिलदारनगर, भदौरा, गहमर होते हुए बारा के कर्मनाशा नदी तक जाती है। यह किसानों का दुर्भाग्य है कि यह क्षेत्र नहरों से पटे होने के बावजूद उनमें पानी नहीं है।
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