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गंगा कटान से समाप्त हो चुका है तीन गांवों का अस्तित्व
Updated Fri, 03 Aug 2018 11:40 PM IST
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गाजीपुर। जिले के जमानिया, मुहम्मदाबाद के सेमरा, शिवरायकापुरा आदि तटवर्टी इलाकों में वर्षों से गंगा कटान का क्रम जारी है। कटान की वजह से करंडा क्षेत्र के नूरनपुर, शेरपुर, कसेरा गांव का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। चार दशक में यहां के करीब पांच सौ घर और लगभग 18 सौ एकड़ भूमि गंगा में समाहित हो गई। 15 वर्षों से अब गंगा भूमि को काटते हुए बड़हरिया, रफीपुर, सोकनी और पूजन बाबा आश्रम की तरफ तेजी से बढ़ रही है। यदि कटान का कहर ऐसे ही जारी रहा तो कई मकान गंगा की लहरों में समा जाएंगे और आबादी वाले स्थान पर गंगा की लहरें दिखाई देंगी।
करीब चार दशक पहले गंगा किनारे के गांव नुरनपुर, शेरपुर और कसेरा में लोगों की आबादी हुआ करती थी। चारों तरफ घर और पेड़-पौधे दिखाई देते थे। इसी बीच मां गंगा ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया और कटान का क्रम शुरू हो गया। खासकर प्रत्येक वर्ष बारिश के मौसम में गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने पर पतित पावनी से भूमि को काटते हुए गांव की तरफ बढ़ने लगी थी। धीरे-धीरे चार दशक में यहां के करीब पांच सौ घर और लगभग 18 सौ एकड़ भूमि गंगा में समाहित हो गई और पूरे गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। अब गंगा भूमि को काटते हुए बड़हरिया, रफीपुर, सोकनी और पूजन बाबा आश्रम की तरफ तेजी से बढ़ रही है। इससे यहां रहने वालों की माथे पर बल पड़ने लगा है। हर दिन मां गंगा कुछ न कुछ भूमि को अपनी आगोश में ले रही है। यदि कटान का कहर नहीं रुका तो बड़हरिया गांव के करीब दस मकान मां गंगा की गोद में समा जाएंगे।
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करीब चार दशक पहले गंगा किनारे के गांव नुरनपुर, शेरपुर और कसेरा में लोगों की आबादी हुआ करती थी। चारों तरफ घर और पेड़-पौधे दिखाई देते थे। इसी बीच मां गंगा ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया और कटान का क्रम शुरू हो गया। खासकर प्रत्येक वर्ष बारिश के मौसम में गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने पर पतित पावनी से भूमि को काटते हुए गांव की तरफ बढ़ने लगी थी। धीरे-धीरे चार दशक में यहां के करीब पांच सौ घर और लगभग 18 सौ एकड़ भूमि गंगा में समाहित हो गई और पूरे गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। अब गंगा भूमि को काटते हुए बड़हरिया, रफीपुर, सोकनी और पूजन बाबा आश्रम की तरफ तेजी से बढ़ रही है। इससे यहां रहने वालों की माथे पर बल पड़ने लगा है। हर दिन मां गंगा कुछ न कुछ भूमि को अपनी आगोश में ले रही है। यदि कटान का कहर नहीं रुका तो बड़हरिया गांव के करीब दस मकान मां गंगा की गोद में समा जाएंगे।
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