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कटान: करंडा में आठ बीघा भूमि गंगा में हुई समाहित
Updated Thu, 02 Aug 2018 11:28 PM IST
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करंडा(गाजीपुर)। एक बार फिर से गंगा के जलस्तर में वृद्धि शुरू होते ही कटान की रफ्तार भी बढ़ गई। गुरुवार को किसानों की आंखों के सामने ही लगभग आठ बीघा कृषि योग्य भूमि को पतित पावनी ने अपनी आगोश में ले लिया। कटान की रफ्तार देख किसानों के माथे पर इस बात से तनाव व्याप्त हो गया कि यदि इसी तरह से गंगा का पानी बढ़ता गया तो इस वर्ष भी अपनी बेशकीमती भूमि से हाथ धोना पड़ेगा।
करंडा क्षेत्र के कटान का कहर कोई नई बात नहीं है। वर्षों से मां गंगा लोगों के आशियाने और खेती योग्य भूमि को लीलती रही है। कटान की वजह से पुरैना का अस्तित्व ही पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। पिछले कई कुछ वर्षों से रफीपुर, सोकनी, बड़हरिया, पूजन बाबा का आश्रम सहित अन्य कई इलाके कटान की जद में हैं। बड़हरिया में बीते 29 जुलाई को गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने पर विभिन्न किसानों की पांच बीघा भूमि कटान की भेंट चढ़ गई थी। इसके बाद कटान की रफ्तार काफी धीमा होने पर पीड़ितों ने काफी राहत महसूस की, लेकिन गुरुवार को पुन: एक बार गंगा का पानी बढ़ने से कटान की रफ्तार भी वृद्धि हो गई है। कुछ ही घंटों में किसानों के आंखों के सामने ही करीब आठ बीघा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। जिनकी भूमि कटान की भेंट चढ़ी है, उनमें नौदर गांव निवासी शिवपूजन सिंह, रामपूजन सिंह, दिनेश सिंह, जनार्दन सिंह, रामकुमार सिंह, सर्वदेव सिंह, पंचदेव सिंह, मृत्युंजय सिंह, प्रिंस सिंह और दीनापुर के धनजंय सिंह, रमाशंकर सिंह, गोपाल सिंह, उमाशंकर सिंह, रामअवतार सिंह, कृष्णावतार सिंह, राधेश्याम सिंह, रामदेव सिंह, राजेश, कमलेश सिंह, योगेश सिंह और बड़हरिया गांव के सुदामा, रामअवतार, अंबिका यादव, सुखराम, रमापति गौतम, संकठा, हरखनाथ, किशोर, प्रभू, मुन्नीलाल, देवनारायण, तेजनारायण, हरिदयाल, कपिलदेव, गोविंद, दयाशंकर, कमला, शामू, कंचन, जोखन, बहादुर यादव, राजबंशी, शोभनाथ, दधिबल, विजय, श्यामनारायण, अंगद, बसगित, शिवमूरत आदि की लगभग आठ बीघा भूमि गंगा में समाहित हो गई।
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करंडा क्षेत्र के कटान का कहर कोई नई बात नहीं है। वर्षों से मां गंगा लोगों के आशियाने और खेती योग्य भूमि को लीलती रही है। कटान की वजह से पुरैना का अस्तित्व ही पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। पिछले कई कुछ वर्षों से रफीपुर, सोकनी, बड़हरिया, पूजन बाबा का आश्रम सहित अन्य कई इलाके कटान की जद में हैं। बड़हरिया में बीते 29 जुलाई को गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने पर विभिन्न किसानों की पांच बीघा भूमि कटान की भेंट चढ़ गई थी। इसके बाद कटान की रफ्तार काफी धीमा होने पर पीड़ितों ने काफी राहत महसूस की, लेकिन गुरुवार को पुन: एक बार गंगा का पानी बढ़ने से कटान की रफ्तार भी वृद्धि हो गई है। कुछ ही घंटों में किसानों के आंखों के सामने ही करीब आठ बीघा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। जिनकी भूमि कटान की भेंट चढ़ी है, उनमें नौदर गांव निवासी शिवपूजन सिंह, रामपूजन सिंह, दिनेश सिंह, जनार्दन सिंह, रामकुमार सिंह, सर्वदेव सिंह, पंचदेव सिंह, मृत्युंजय सिंह, प्रिंस सिंह और दीनापुर के धनजंय सिंह, रमाशंकर सिंह, गोपाल सिंह, उमाशंकर सिंह, रामअवतार सिंह, कृष्णावतार सिंह, राधेश्याम सिंह, रामदेव सिंह, राजेश, कमलेश सिंह, योगेश सिंह और बड़हरिया गांव के सुदामा, रामअवतार, अंबिका यादव, सुखराम, रमापति गौतम, संकठा, हरखनाथ, किशोर, प्रभू, मुन्नीलाल, देवनारायण, तेजनारायण, हरिदयाल, कपिलदेव, गोविंद, दयाशंकर, कमला, शामू, कंचन, जोखन, बहादुर यादव, राजबंशी, शोभनाथ, दधिबल, विजय, श्यामनारायण, अंगद, बसगित, शिवमूरत आदि की लगभग आठ बीघा भूमि गंगा में समाहित हो गई।
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