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अवर्षण: सूख रही है धान की नर्सरी
Updated Fri, 15 Jun 2018 10:56 PM IST
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गाजीपुर। अभी तक बारिश न होने के कारण जिले के किसानों की चिंता गहरा गई है। एक ओर धूप तथा उमस से लोग बेहाल हैं, वहीं खरीफ की खेती के पिछड़ने की चिंता भी किसानों को खाए जा रही है। हालांकि पिछले दिनों कई क्षेत्रों में छिटपुट बरसात हुई पर इससे न तो गर्मी ही कम हुई है और न ही किसानों को ही फायदा पहुंचा।
करीमुद्दीनपुर संवाददाता के अनुसार इस क्षेत्र में अब तक बरसात न होने से खेती का कार्य बाधित होता जा रहा है। धान की नर्सरियां सूख रही हैं। पलेवा के अभाव में रोपनी भी नहीं हो पा रही है। जलस्तर भी नीचे चला गया है, जिससे ट्यूबवेल और हैंडपंप भी साथ छोड़ने लगे हैं। सिंचाई के साथ ही पेयजल संकट भी गहरा गया है। जून का महीना आधा बीत गया है। इस अवर्षण की वजह से की प्रकार की समस्या बनी हुई है। धान की नर्सरी, पशुओं का चारा, बरसाती सब्जियां सहित अन्य फसल खेतों में सूख रही है। धान का बेहन डालने में भी बड़ी परेशानी हो रही है। काफी मेहनत और खर्च लग रहा है। नर्सरी को हरा भरा रखने में पानी की आवश्यकता पड़ रही है, जो निजी साधनों से लेने में किसानों की कमर टूट जा रही है। क्षेत्र के बिश्वानन्द तिवारी, अरबिंद कुमार राय, प्रमोद राय आदि किसानों ने बताया कि अच्छी बरसात न होने से डाली गई धन धान की नर्सरी, चरी, सब्जियां आदि मुरझा गई हैं। लागत लगाने के बाद भी मौसम की इस बेरुखी से मायूसी छा गई है। यदि जल्दी ही बरसात नहीं हुई तो सिंचाई और पेयजल संकट के साथ ही कई प्रकार की समस्याएं बढ़ जाएंगी। खेती भी पिछड़ रही है।
गहमर प्रतिनिधि के अनुसार बादलों की लुकाछिपी से किसानों की समस्या बढ़ती जा रही है। आसमान में बादल छा तो रहे है लेकिन बरस नहीं रहे है। इधर लगातार दो-तीन दिनों से मौसम में बदलाव को देखते हुए किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं। खेती कार्य से जुड़े सुधीर सिंह, सुनील सिंह, पीयूष उपाध्याय, राहुल सिंह आदि ने बताया कि आसमान में बादल मंडरा रहे हैं, जिसको देखकर मानसून की आहट दिखाई देने लगी है। बरसात की आवश्यकता है।
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औड़िहार संवाददाता के मुताबिक दिनों दिन बढ़ रहे तापमान और आसमान से बरस रही आग के कारण लोगों का घर से निकालना मुहाल है। इन दिनों पारा 43 डिग्री के आस-पास पहुंच गया है। इस कारण कहीं से भी राहत महसूस नहीं हो रही है। लोग बेसब्री से वर्षा का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन धूल भरी आंधी तथा गर्द के अलावा अभी वर्षा दूर तक महसूस नहीं हो रही है। दूसरी ओर ताल-पोखरों का अस्तित्व समाप्त हो जाने तथा नदियों के सूख जाने अथवा उनके तलहटी में चले जाने के कारण पशु -पक्षी भी गर्मी से बेहाल हो पानी के लिए तड़फ रहे हैं। गर्मी में भाग रहे जलस्तर के चलते पशु पालकों की समस्याएं बढ़ती जा रही है। पशु पालकों एवं किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गर्मी को देखते हुए पशुपालकों एवं अन्य जीव-जंतुओं की सुविधा के लिए देवकली पंप नहर को चालू रखा जाए।
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करीमुद्दीनपुर संवाददाता के अनुसार इस क्षेत्र में अब तक बरसात न होने से खेती का कार्य बाधित होता जा रहा है। धान की नर्सरियां सूख रही हैं। पलेवा के अभाव में रोपनी भी नहीं हो पा रही है। जलस्तर भी नीचे चला गया है, जिससे ट्यूबवेल और हैंडपंप भी साथ छोड़ने लगे हैं। सिंचाई के साथ ही पेयजल संकट भी गहरा गया है। जून का महीना आधा बीत गया है। इस अवर्षण की वजह से की प्रकार की समस्या बनी हुई है। धान की नर्सरी, पशुओं का चारा, बरसाती सब्जियां सहित अन्य फसल खेतों में सूख रही है। धान का बेहन डालने में भी बड़ी परेशानी हो रही है। काफी मेहनत और खर्च लग रहा है। नर्सरी को हरा भरा रखने में पानी की आवश्यकता पड़ रही है, जो निजी साधनों से लेने में किसानों की कमर टूट जा रही है। क्षेत्र के बिश्वानन्द तिवारी, अरबिंद कुमार राय, प्रमोद राय आदि किसानों ने बताया कि अच्छी बरसात न होने से डाली गई धन धान की नर्सरी, चरी, सब्जियां आदि मुरझा गई हैं। लागत लगाने के बाद भी मौसम की इस बेरुखी से मायूसी छा गई है। यदि जल्दी ही बरसात नहीं हुई तो सिंचाई और पेयजल संकट के साथ ही कई प्रकार की समस्याएं बढ़ जाएंगी। खेती भी पिछड़ रही है।
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गहमर प्रतिनिधि के अनुसार बादलों की लुकाछिपी से किसानों की समस्या बढ़ती जा रही है। आसमान में बादल छा तो रहे है लेकिन बरस नहीं रहे है। इधर लगातार दो-तीन दिनों से मौसम में बदलाव को देखते हुए किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं। खेती कार्य से जुड़े सुधीर सिंह, सुनील सिंह, पीयूष उपाध्याय, राहुल सिंह आदि ने बताया कि आसमान में बादल मंडरा रहे हैं, जिसको देखकर मानसून की आहट दिखाई देने लगी है। बरसात की आवश्यकता है।
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औड़िहार संवाददाता के मुताबिक दिनों दिन बढ़ रहे तापमान और आसमान से बरस रही आग के कारण लोगों का घर से निकालना मुहाल है। इन दिनों पारा 43 डिग्री के आस-पास पहुंच गया है। इस कारण कहीं से भी राहत महसूस नहीं हो रही है। लोग बेसब्री से वर्षा का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन धूल भरी आंधी तथा गर्द के अलावा अभी वर्षा दूर तक महसूस नहीं हो रही है। दूसरी ओर ताल-पोखरों का अस्तित्व समाप्त हो जाने तथा नदियों के सूख जाने अथवा उनके तलहटी में चले जाने के कारण पशु -पक्षी भी गर्मी से बेहाल हो पानी के लिए तड़फ रहे हैं। गर्मी में भाग रहे जलस्तर के चलते पशु पालकों की समस्याएं बढ़ती जा रही है। पशु पालकों एवं किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गर्मी को देखते हुए पशुपालकों एवं अन्य जीव-जंतुओं की सुविधा के लिए देवकली पंप नहर को चालू रखा जाए।