{"_id":"5a47d6d24f1c1bce408c00fb","slug":"31514657490-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठंड ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर किया।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठंड ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर किया।
Updated Sat, 30 Dec 2017 11:41 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर (गाजीपुर)। ‘मेघे जाड़ न माघे जाड़, कहे घाघ बतासे जाड़’ उक्त पंक्तियां सर्द पछुआ हवा और शीतलहर को चरितार्थ कर रही है। रक्त जमा देने वाला और हाड़कंपाने वाला ठंड लोगों को ठुठरने पर मजबूर कर दे रहा है। ठंड इतनी की सुबह घर से निकलना मुश्किल हो गया है। लोग अलाव और गर्म चाय की चुस्की के सहारे शरीर पर गर्म कपड़ों का बोझ लिए कंपकंपी से बचने की नाकाम कोशिश में जुटे रहे। गलन बढ़ने से घर में दुबककर रहने को लोग मजबूर रहे। शनिवार को अधिकतम तापमान 20 डिग्री और न्यूनतम आठ डिग्री रहा।
शनिवार को सर्द हवा के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। अहले सुबह जहां कहीं अलाव देखा उसके इर्द-गिर्द कई लोग इकट्ठा होकर बदन को गर्म करते देखे गए। आसमान के आंचल छाए गहरे कोहरे के कारण पूरे दिन सूर्य का दर्शन तक नहीं हुआ। पूरे दिन लोग ठंड से कांपते नजर आए। कब सुबह और कब शाम हुई पता ही नहीं चला। दिन इतना छोटा की पता ही नहीं चला और दिन खत्म हो गया। दिन ढलने से पहले ही पुन: शहर और गांव कोहरे की जद में आ गए। ठंड के वही तेवर और आम जनजीवन बेहाल। मानव, पशु, पक्षी सभी को सर्दी कई दिनों से हिला रही है। लोग घर के अंदर हीटर, बोरसी में गोयठी और लकड़ी डालकर बच्चें तथा महिलाएं ठंड से बचाव करते दिख रहे हैं। इस ठंड से सबसे ज्यादा दिक्कते मक्का और गेंहू फसल में पानी पटवन करने वाले किसानों को हो रहा है। बहरहाल ठंड के अचानक बढ़ जाने के वजह से चाय और गर्म कपड़ों की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगी है। वहीं सड़कों पर सन्नाटा छाए हुए है।
विज्ञापन
शनिवार को सर्द हवा के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। अहले सुबह जहां कहीं अलाव देखा उसके इर्द-गिर्द कई लोग इकट्ठा होकर बदन को गर्म करते देखे गए। आसमान के आंचल छाए गहरे कोहरे के कारण पूरे दिन सूर्य का दर्शन तक नहीं हुआ। पूरे दिन लोग ठंड से कांपते नजर आए। कब सुबह और कब शाम हुई पता ही नहीं चला। दिन इतना छोटा की पता ही नहीं चला और दिन खत्म हो गया। दिन ढलने से पहले ही पुन: शहर और गांव कोहरे की जद में आ गए। ठंड के वही तेवर और आम जनजीवन बेहाल। मानव, पशु, पक्षी सभी को सर्दी कई दिनों से हिला रही है। लोग घर के अंदर हीटर, बोरसी में गोयठी और लकड़ी डालकर बच्चें तथा महिलाएं ठंड से बचाव करते दिख रहे हैं। इस ठंड से सबसे ज्यादा दिक्कते मक्का और गेंहू फसल में पानी पटवन करने वाले किसानों को हो रहा है। बहरहाल ठंड के अचानक बढ़ जाने के वजह से चाय और गर्म कपड़ों की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगी है। वहीं सड़कों पर सन्नाटा छाए हुए है।
विज्ञापन