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यह बात हृदय में चुभती है, पृथ्वी वीरों से खाली है
Updated Sun, 14 Oct 2018 10:44 PM IST
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गाजीपुर। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से आयोजित रामलीला में शनिवार को राजा शंभूनाथ के बाग में जयंत नेत्र भंग, ऋषि अत्रि मिलन तथा सीता अनुसुइया संवाद आदि प्रसंग का मंचन किया गया।
रामलीला के तहत देवराज इंद्र का पुत्र जयंत कौए का रूप धारण कर सीताजी के कोमल चरण में चोंच मारकर भाग जाता है। पैर से रुधिर बहता देखकर राम घबरा जाते हैं तथा उस पर बाण चला देते हैं। बाद में उसके क्षमा मांगने पर राम दया करते हुए उसका एक आंख तीर से भंग कर देते हैं। रामलीला समिति धारानगर मुहम्मदाबाद में धनुष यज्ञ तथा परशुराम लक्ष्मण संवाद आदि का मंचन किया गया। बड़े-बड़े योद्धा जब धनुष को हिला भी नहीं पाते हैं तो राजा जनक बहुत दुखी होते हुए कहते हैं कि इस पृथ्वी पर कोई वीर ही नहीं रह गया है। यह वाक्य लखन लाल को गवारा नहीं लगता। वह कहते हैं कि अभी बड़े भाई राम तो बैठे हैं। वह गरज कर बोले कि यह बात हृदय में चुभती है कि पृथ्वी वीरों से खाली है। लक्ष्मण की भूमिका में अभिषेक पांडेय ने अपने अभिनय से सराहना बटोरी। परशुराम के साथ संवाद में भी उनकी गरजती आवाज और परशुराम को चिढ़ाने का अंदाज अलग था। राम बने नवनीत पांडेय मंच पर काफी शांत भूमिका में रहे। स्वयंवर में जब वह धनुष को तोड़ते हैं तो पूरा वातावरण रामजी के जयकारे से गूंज उठता है। राजा जनक की भूमिका मुरलीधर पाठक तथा बाणासुर की पीयूष राय लाला ने निभाई। रामलीला के संचालन में रवि पांडेय, ओपी गिरी, केडी राय, धर्मचंद गिरी, लालबाबू जायसवाल, प्रमोद राय बबलू, रामजी गिरी आदि ने सराहनीय योगदान किया।
रामलीला के तहत देवराज इंद्र का पुत्र जयंत कौए का रूप धारण कर सीताजी के कोमल चरण में चोंच मारकर भाग जाता है। पैर से रुधिर बहता देखकर राम घबरा जाते हैं तथा उस पर बाण चला देते हैं। बाद में उसके क्षमा मांगने पर राम दया करते हुए उसका एक आंख तीर से भंग कर देते हैं। रामलीला समिति धारानगर मुहम्मदाबाद में धनुष यज्ञ तथा परशुराम लक्ष्मण संवाद आदि का मंचन किया गया। बड़े-बड़े योद्धा जब धनुष को हिला भी नहीं पाते हैं तो राजा जनक बहुत दुखी होते हुए कहते हैं कि इस पृथ्वी पर कोई वीर ही नहीं रह गया है। यह वाक्य लखन लाल को गवारा नहीं लगता। वह कहते हैं कि अभी बड़े भाई राम तो बैठे हैं। वह गरज कर बोले कि यह बात हृदय में चुभती है कि पृथ्वी वीरों से खाली है। लक्ष्मण की भूमिका में अभिषेक पांडेय ने अपने अभिनय से सराहना बटोरी। परशुराम के साथ संवाद में भी उनकी गरजती आवाज और परशुराम को चिढ़ाने का अंदाज अलग था। राम बने नवनीत पांडेय मंच पर काफी शांत भूमिका में रहे। स्वयंवर में जब वह धनुष को तोड़ते हैं तो पूरा वातावरण रामजी के जयकारे से गूंज उठता है। राजा जनक की भूमिका मुरलीधर पाठक तथा बाणासुर की पीयूष राय लाला ने निभाई। रामलीला के संचालन में रवि पांडेय, ओपी गिरी, केडी राय, धर्मचंद गिरी, लालबाबू जायसवाल, प्रमोद राय बबलू, रामजी गिरी आदि ने सराहनीय योगदान किया।
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