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चिकित्सक गायब, मरीज परेशान
Updated Fri, 07 Sep 2018 11:17 PM IST
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सुहवल(गाजीपुर)। सांसद भरत सिंह की ओर से गोद लिए गांव डेढ़गांवा के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। कारण यह है कि यहां पर तैनात चिकित्सक प्राय: गायब रहते हैं। न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीज देर तक इंतजार करने के बाद निजी चिकित्सकों की ओर रूख कर देते हैं। चिकित्सक के गायब रहने की शिकायत कई बार आला अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई असर नहीं पड़ता।
रेवतीपुर ब्लाक के डेढ़गावां को शहीद कर्नल एमएन राय के गांव के नाम से जाना जाता है। जिसे गोद लेकर बलिया के सांसद ने सर्वांगीण विकास का जिम्मा लिया। यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्सक समय से नहीं आते। अधिकतर मरीजों को तो यहां तैनात फार्मासिस्ट ही देख लेता है। मरीजों की माने तो चिकित्सक की लापरवाही के चलते बेहतर स्वास्थ सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। गंभीर हालत में लोग निजी चिकित्सकों के पास जाते है। जहां उनका शोषण होता है। यह स्वास्थ्य केंद्र आधा दर्जन गांवों से जुड़ा हुआ है। इस स्वास्थ्य केन्द्र पर एक चिकित्साधिकारी, एक नान मेडिकल असिस्टेंट, एक असिस्टेंट लैब टेक्निशियन, एक स्वीपर, एक वार्डव्याय, एक फार्मासिस्ट, सहित दो एएनएम का पद है। यहां इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी, लैब सहित 10 बेड की भी सुविधा है। डॉक्टर की गैर हाजिरी के कारण अन्य कर्मचारी भी लापरवाह बने रहते है। दवाओं का वितरण, टीकाकरण समेत कई प्रकार की योजनाओं के लाभ से यहां के लोग वंचित रह जाते है। मरीजों ने बताया कि इस अस्पताल के चिकित्सक हमेशा गायब रहते है। पूछे जाने पर कोई सही जबाब देने वाला भी नहीं मिलता। रोज सुबह बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए आते है लेकिन बाद में निराश हो कर चले जाते है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर गिरीश चंद्र मौर्या ने बताया कि यह काफी गंभीर विषय है। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तथा शासन को भी अवगत कराया जाएगा।
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रेवतीपुर ब्लाक के डेढ़गावां को शहीद कर्नल एमएन राय के गांव के नाम से जाना जाता है। जिसे गोद लेकर बलिया के सांसद ने सर्वांगीण विकास का जिम्मा लिया। यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्सक समय से नहीं आते। अधिकतर मरीजों को तो यहां तैनात फार्मासिस्ट ही देख लेता है। मरीजों की माने तो चिकित्सक की लापरवाही के चलते बेहतर स्वास्थ सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। गंभीर हालत में लोग निजी चिकित्सकों के पास जाते है। जहां उनका शोषण होता है। यह स्वास्थ्य केंद्र आधा दर्जन गांवों से जुड़ा हुआ है। इस स्वास्थ्य केन्द्र पर एक चिकित्साधिकारी, एक नान मेडिकल असिस्टेंट, एक असिस्टेंट लैब टेक्निशियन, एक स्वीपर, एक वार्डव्याय, एक फार्मासिस्ट, सहित दो एएनएम का पद है। यहां इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी, लैब सहित 10 बेड की भी सुविधा है। डॉक्टर की गैर हाजिरी के कारण अन्य कर्मचारी भी लापरवाह बने रहते है। दवाओं का वितरण, टीकाकरण समेत कई प्रकार की योजनाओं के लाभ से यहां के लोग वंचित रह जाते है। मरीजों ने बताया कि इस अस्पताल के चिकित्सक हमेशा गायब रहते है। पूछे जाने पर कोई सही जबाब देने वाला भी नहीं मिलता। रोज सुबह बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए आते है लेकिन बाद में निराश हो कर चले जाते है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर गिरीश चंद्र मौर्या ने बताया कि यह काफी गंभीर विषय है। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तथा शासन को भी अवगत कराया जाएगा।
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