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अजोला की खेती के बारे में जागरूक किया
Updated Sat, 28 Apr 2018 11:08 PM IST
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गाजीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से ‘विश्व पशु चिकित्सा दिवस’ बाराचवर के रजौली गांव में आयोजित किया गया। केंद्र के पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. डीपी श्रीवास्तव ने बताया कि हर वर्ष देश की अलग-अलग समस्याओं को ध्यान में रखकर उनसे निजात पाने के लिए यह दिवस हर वर्ष अप्रैल माह के अंतिम शनिवार को आयोजित किया जाता है। इस वर्ष यह आजीविका, खाद्य सुरक्षा और सुरक्षा में सुधार के लिए सतत विकास में पशु चिकित्सा पेशे की भूमिका पर आधारित है। विश्व जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण इलाकों में रहता है, जिनकी आजीविका के लिए पशुपालन एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
अजोला की खेती के बारे में जागरूक करते हुए उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा माध्यम है, जो बिना अधिक लागत के पशुओं को वर्ष भर हरा चारा उपलब्ध कराता है। इसके जरिए पशुपालन से आसानी से किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। अजोला छाएदार स्थानों पर घर के आसपास या बागीचे में आसानी से उगाया जा सकता है। यह प्रोटीन युक्त हरा चारा है, जो आसानी से पशु की उत्पादकता 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। इसमें अधिक मात्रा में मिनरल पाए जाने के कारण यह पशु की प्रजनन क्षमता को भी बढ़ाता है। केंद्र के सीनियर साइंटिस्ट एंड हेड डॉ. दिनेश सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सक एक ऐसा निपुण डॉक्टर होता है, जो न बोलने वाले जीवों का भी उचित उपचार करता है। मृदा वैज्ञानिक डॉ. डीके सिंह ने पशुपालन द्वारा मिट्टी की उत्पादकता बढ़ाने में योगदान पर चर्चा की। इस दौरान, किसानों के लिए पशु चिकित्सा शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें कुल 70 जानवरों की समस्या के अनुसार, नि:शुल्क उपचार किया गया। इस मौके पर 37 किसान आदि उपस्थित थे।
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अजोला की खेती के बारे में जागरूक करते हुए उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा माध्यम है, जो बिना अधिक लागत के पशुओं को वर्ष भर हरा चारा उपलब्ध कराता है। इसके जरिए पशुपालन से आसानी से किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। अजोला छाएदार स्थानों पर घर के आसपास या बागीचे में आसानी से उगाया जा सकता है। यह प्रोटीन युक्त हरा चारा है, जो आसानी से पशु की उत्पादकता 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। इसमें अधिक मात्रा में मिनरल पाए जाने के कारण यह पशु की प्रजनन क्षमता को भी बढ़ाता है। केंद्र के सीनियर साइंटिस्ट एंड हेड डॉ. दिनेश सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सक एक ऐसा निपुण डॉक्टर होता है, जो न बोलने वाले जीवों का भी उचित उपचार करता है। मृदा वैज्ञानिक डॉ. डीके सिंह ने पशुपालन द्वारा मिट्टी की उत्पादकता बढ़ाने में योगदान पर चर्चा की। इस दौरान, किसानों के लिए पशु चिकित्सा शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें कुल 70 जानवरों की समस्या के अनुसार, नि:शुल्क उपचार किया गया। इस मौके पर 37 किसान आदि उपस्थित थे।
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