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आधुनिक सिंचाई पद्घति से खेतों में लहलहाएगी फसलें

Thu, 15 Feb 2018 11:08 PM IST
Updated Thu, 15 Feb 2018 11:08 PM IST
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आधुनिक सिंचाई पद्घति से खेतों में लहलहाएगी फसलें
गाजीपुर।
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आधुनिक सिंचाई पद्घति से अब खेतों में फसलें लहलहाएगी। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम फसलों को सूखने से बचाएगा। इस सिस्टम को लगाने पर किसानों को उद्यान विभाग की ओर से अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा। जिले में अभी तक 225 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि पर किसान इस सिस्टम को लगवाकर खेती आरंभ कर दिए हैं। जिले के अन्य किसानों को भी इसके लिए जागरूक किया जा रहा है।
अक्सर नहरों में पानी न आना और राजकीय नलकूपों के खराब रहने के कारण सिंचाई के अभाव में फसलें सूख जाती हैं। इसके चलते, किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। निजी नलकूपों का सहारा लेने में उन्हें काफी दिक्कत का सामना करने के साथ आर्थिक बोझ भी सहना पड़ता है। इस परेशानी को देख सिंचाई की पद्घति को आधुनिक बनाते हुए शासन की ओर से ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम का लाभ जिले के किसानों को देने का निर्देश उद्यान विभाग को दिया। साथ ही इसके लिए उन्हें 588 हेक्टेयर की खेती योग्य भूमि में इस सिस्टम को लगाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। विभाग की ओर से, अभी तक 225 हेक्टेयर में इस सिस्टम को लगवाया गया है। इस पद्घति को लगाने से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए नहरों, राजकीय नलकूपों और निजी नलकूपों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।
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जिला उद्यान अधिकारी डॉ. एके वर्मा ने बताया कि इस पद्घति से किसानों को सिंचाई की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। इस सिस्टम से पानी फसलों को आवश्यकतानुसार मिलता है। सबसे अच्छी बात यह है कि अधिक पानी लगने से फसलों के खराब होने की समस्या से किसानों को इस सिस्टम से पूर्णत: छुटकारा मिल जाता है।
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एक हेक्टेयर में 26 हजार की आती है लागत
इस सिस्टम को एक हेक्टेयर में लगवाने पर 26 हजार रुपये की लागत आती है। इस लागत का 90 प्रतिशत अनुदान के रूप में किसानों को मिलता है। जैसे एक हेक्टेयर के लिए 22 हजार 667 रुपये अनुदान के रूप में किसानों को मिल जाता है।


60 प्रतिशत बचता है पानी
सिंचाई की इस पद्घति से 40 से 60 प्रतिशत पानी बचता है। वहीं उत्पादन भी 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इसके चलते, खेतों में खरपतवार भी उगने की संभावना भी कम होती है। फसलों की जड़ों तक उर्वरक और अन्य रसायन घोल पहुंचाने के लिए लाभप्रद होता है। इस विधि से कम मात्रा में ही फसलों पर छिड़काव हो जाता है। कम मेहनत और समय की बचत के बीच गुणवत्तायुक्त अधिक उत्पादन होता है।
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